फ़ूड डेस्क: लॉकडाउन में लोगों को एक ख़ास तरह की समस्या का सामना करना पड़ा। इस दौरान कई लोग काफी समय बाद घरों में रहने को मजबूर हुए। तो शुरुआत के कुछ महीनों में लोगों ने जमकर कुकिंग की और उतना ही जमकर खाना भी खाया। लेकिन चूंकि लॉकडाउन में लोग घर से बाहर नहीं निकल सकते थे, ऐसे में उनकी फिजिकल एक्टिविटी हो गई जीरो। नतीजा हुआ वेट गेन। कई लोगों ने लॉकडाउन में काफी ज्यादा वेट बढ़ा लिया। इसके बाद अब सभी हेल्दी खाने के ऑप्शन ढूंढ रहे हैं ताकि उनका वजन तेजी से कम हो पाए। चावल खाएं या रोटी या फिर ब्राउन ब्रेड खाएं या व्हाइट ब्रेड? डायटिशियन्स से ये सारे सवाल काफी ज्यादा पूछे जाते हैं। आज हम आपो ब्राउन और व्हाइट ब्रेड में ज्यादा हेल्दी ऑप्शन के में बताने जा रहे हैं। इस सवाल का जवाब जान आप दंग रह जाएंगे। क्यूंकि अभी तक जो जानकारी हमें थी वो मात्र मार्केटिंग का हिस्सा थी...
लंबे समय से आपने ये सुना होगा कि ब्राउन ब्रेड काफी फायदेमंद होती है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं। सबसे ख़ास बात कि ब्राउन ब्रेड खाने से वजन घटता है। इसके बाद लोगों में ब्राउन ब्रेड का क्रेज शुरू हो गया। लोग व्हाइट की जगह ब्राउन ब्रेड ही खरीदने लगे। लेकिन आपको बता दें कि ये सब मार्केटिंग की स्ट्रेटजी है।
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अगर न्यूट्रिशनल वैल्यू पर जाए तो ब्राउन और व्हाइट ब्रेड में कोई ख़ास फर्क नहीं है। बात अगर दोनों के बीच करें तो सिर्फ इनमें फाइबर का अंतर होता है। इसके अलावा वजन कंट्रोल करने के लिए ब्राउन ब्रेड में ऐसा कोई ख़ास गुण नहीं होता।
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बात अगर दोनों तरह के ब्रेड्स में अंतर की करें तो ब्राउन ब्रेड में व्हाइट ब्रेड की तुलना में ज्यादा चीनी मौजूद होती है। इसकी वजह है ब्रेड को ब्राउन रंग देने के लिए इस्तेमाल किया गया कारमेल।
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ब्राउन और व्हाइट ब्रेड तैयार एक तरह से की किया जाता है। सिर्फ रंग बदलने के लिए ब्राउन ब्रेड में कारमेल मिला देते हैं। इससे ब्रेड का रंग भूरा हो जाता है।
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बताया जाता है कि ब्राउन ब्रेड पूरा गेहूं से बनाया जाता। लेकिन ये सच नहीं है। ये 100% पूरे गेहूं के आटे से नहीं बनता। इसमें मैदा भी मिलाया जाता है।
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ब्राउन ब्रेड में फैट की मात्रा भी व्हाइट ब्रेड से ज्यादा होता है। साथ ही इसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा ब्राउन ब्रेड से दुगुनी होती है। ऐसे में कम मात्रा में तो ठीक है लेकिन ज्यादा ब्राउन ब्रेड खाने मुश्किल में पड़ जाएंगे।
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बात अगर कैल्शियम की करें, तो ब्राउन ब्रेड में 100 मिलीग्राम तो व्हाइट ब्रेड में 91 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। कैल्शियम हड्डियों को मजबूती देता है। इस पोषक तत्व में भी व्हाइट ब्रेड ब्राउन से ज्यादा पीछे नहीं है।
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फाइबर की बात करें तो ब्राउन ब्रेड में व्हाइट के मुकाबले ज्यादा फाइबर होता है। इस वजह से ब्राउन ब्रेड व्हाइट के मुकाबले जल्दी पच जाता है। साथ ही इसमें प्रोटीन की मात्रा भी व्हाइट ब्रेड से थोड़ी ज्यादा होती है।
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ऐसे में ये कहना कि ब्राउन ब्रेड से वजन कम होता है गलत है। डायटीशियन के मुताबिक, अगर आप वजन घटना चाहते हैं तो ब्रेड की जगह रोटी खाएं। ये सबसे अच्छा ऑप्शन है।
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