चमोली हादसा: 7 दिन बाद टनल से जिंदगियां नहीं, सिर्फ लाशें निकल रहीं, पहाड़ी पर मंडरा रहा खतरा

Published : Feb 14, 2021, 09:29 AM IST

नई दिल्ली. उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने की भयंकर प्राकृतिक आपदा को हफ्तेभर हो गया है। 7 फरवरी को ग्लेशियर टूटने के बाद जो बाढ़ आई थी, उसमें मरने वालों की संख्या 43 तक पहुंच गई है। हादसे में 204 लोग लापता हुए थे। रविवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तपोवन सुरंग से पांच और शव मिले। रेस्क्यू लगातार जारी है, लेकिन सुरंग में फंसे लोगों के जीवित होने की संभावनाएं अब खत्म-सी हो गई हैं। टनल में कीचड़ भरा हुआ है। उसे हटाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपदा के बाद अभी भी आसपास के कई गांवों का संपर्क टूटा हुआ है। आईटीबीपी राहत कैंप लगाकर लोगों को मदद दे रही है। बता दें कि ग्लेशियर टूटने के बाद तपोवन स्थित NTPC की टनल में गीला मलबा भर गया था।

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चमोली हादसा:  7 दिन बाद टनल से जिंदगियां नहीं, सिर्फ लाशें निकल रहीं, पहाड़ी पर मंडरा रहा खतरा

ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषि गंगा में आई बाढ़ में बह गए लोगों के परिजन अब निराश हो चुके हैं। सुरंग में फंसे या दूसरी जगह बह गए लोग अब जीवित होंगे, इसकी उम्मीदें दम तोड़ने लगी हैं। शनिवार को सुरंग और बैराज साइट पर पीड़ितों परिजन न के बराबर मौजूद थे। कलेक्टर स्वाति एस भदौरिया उन्हें ढांढस बंधाती रहीं।

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तपोवन हादसे के बाद पर्यावरणविद और वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।  बता दें कि यहां छोटे-बड़े करीब 58 बांध प्रस्तावित हैं। जिनके लिए करीब 1500 किमी लंबी सुरंगें बनाई जा रही हैं। इससे 28 लाख आबादी प्रभावित होगी। वहीं, ग्लेशियर टूटने जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी। यह तस्वीर उत्तराखंड के श्रीनगर के निकट बन रहे पावर प्लांट की है। इसके लिए नदी की धार को पतला कर दिया गया है।

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चमोली की घटना ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। जिस जगह से ग्लेशियर टूटा, अब वहां मलबे के कारण ऋषिगंगा नदी के पानी का बहाव रुक गया है। इससे एक झील बनती जा रही है। अगर भविष्य में यह झील फूटी, तो फिर विनाश आएगा। जिस जगह पर यह ग्लेशियर टूटा था, वो हिमालय का ऊपरी हिस्सा है। इसे रौंटी पीक के नाम से जाना जाता है।  ग्लेशियर टूटने के बाद वो सीधे ऋषिगंगा नदी में नहीं गिरा। वो अपने साथ मलबा लेकर रौंटी स्ट्रीम में आकर गिरा। यह जगह ऋषिगंगा से थोड़ा अलग है। हालांकि रौंटी स्ट्रीम का बहाव आगे जाकर ऋषिगंगा में जाकर मिलता है। ग्लेशियर टूटने के बाद रौंटी स्ट्रीम और ऋषिगंगा के संगम पर गाद और मलबा जमा हो गया है। यानी यहां अस्थायी तौर पर प्राकृतिक बांध बन गया है। यानी ऋषिगंगा का बहाव रुक चुका है। पहाड़ी से जो पानी नीचे आ रहा है, वो रौंटी स्ट्रीम का है।


(ग्लेशियर टूटने की बाद की तस्वीर, इनसेट घटना के बाद नजर बनाए हुए रेस्क्यू टीम)

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बता दें कि 7 फरवरी यानी रविवार की सुबह करीब 10 बजे समुद्र तल से करीब 5600 मीटर की ऊंचाई पर 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का ग्लेशियर टूटकर गिर गया था। इससे धौलीगंगा और ऋषिगंगा में बाढ़ की स्थिति बन गई।  NTPC की टनल में इतना मलबा भरा हुआ है कि उसे निकालने में काफी वक्त लग रहा है।
 

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रेस्क्यू टीम अब तक NTPC की टनल की पूरी  तरह सफाई नहीं कर पाई है। इसमें कितने दिन और लगेंगे, कह पाना मुश्किल है।

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टनल संकरी होने से अंदर सिर्फ एक मशीन ही जा पा रही है। इससे रेस्क्यू में टाइम लग रहा है।

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आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आमजन और संस्थाएं आगे आई हैं। वे उन्हें और रेस्क्यू टीम को खाना मुहैया करा रही हैं।

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आपदा प्रभावित लोगों और रेस्क्यू टीम में लगे लोगों को खाना खिलाते एक संस्थान से जुड़े लोग।

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