तेंदुए के मल से दुश्मन को दिया था धोखा, जानें कैसे 3 किमी अंदर घुसकर 38 आतंकियों को उतारा था मौत के घाट

Published : Sep 29, 2021, 10:25 AM ISTUpdated : Sep 29, 2021, 10:55 AM IST

नई दिल्ली. सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) को पांच साल पूरे हो चुके हैं। 28-29 सितंबर 2016 की रात का समय था। भारतीय सेना के जवानों ने दुश्मनों को ऐसा जख्म दिया, जो उन्हें ताउम्र याद रहेगा। 4 घंटे के अंदर पाकिस्तान (pakistan) में घुसकर आतंकियों के कैंपों को नेस्तानाबूत कर दिया था। फिर वापस अपने देश में भी चले आए। लेकिन सेना ने ऐसी प्लानिंग क्यों की? दरअसल, इस हमले की नींव 18 सितंबर को ही पड़ गई थी। जब आतंकियों ने कश्मीर के उरी में आर्मी कैम्प पर हमला किया, जिसमें सेना के 18 जवान शहीद हो गए। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ बताते हैं कि तीन घंटे में हमें सर्जिकल स्ट्राइक करने की इजाजत मिल गई थी। इस मिशन में बहुत बारीक से बारीक चीज का भी ध्यान रखा गया था। जानें कैसे तेंदुए के मल-मूत्र से दुश्मन को धोखा दिया गया था...?

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तेंदुए के मल से दुश्मन को दिया था धोखा, जानें कैसे 3 किमी अंदर घुसकर 38 आतंकियों को उतारा था मौत के घाट

"हर जवान बदला चाहता था"
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उरी कैम्प पर हुए आतंकी हमले ने सभी को दंग कर दिया था। वह दिन मेरे लिए काला रविवार था। मैंने अपने 18 जवानों को खो दिया था। मैंने उनके शवों को आखिरी सलामी दी। लेकिन मैंने उसी दिन प्रण लिया था। बदला। हर जवान बदला चाहता था। अपने साथियों की मौत की बदला।

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रात 12.30 बजे ऑपरेशन बंदर की शुरुआत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना ने रात करीब 12.30 बजे ऑपरेशन बंदर की शुरुआत की। दुश्मन को घर में घुसकर मारा। आतंकी कैम्पों को तहस-नहस कर दिया। फिर करीब 4.30 बजे अपने कैम्प में वापस लौट आए।

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MI17 हेलिकॉप्टरों से गए थे जवान
इस पूरे ऑपरेशन में स्पेशल फोर्सेज और पैरा कमांडो शामिल थे। बॉर्डर तक ले जाने के लिए MI17 हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया था। इसी के जरिए 150 कमांडोज को बॉर्डर के नजदीक ले जाया गया। इसके बाद भारतीय जवान पैदल ही दुश्मन के कैंप की तरफ बढ़ने लगे।

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पैदल चलते हुए सेना के जवान करीब तीन किलोमीटर तक अंदर घुस गए। फिर वहां पीओके के भिंबर, हॉटस्प्रिंग, तत्तापानी, लीपा सेक्टर और केल में ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों के लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया। करीब 38 आतंकियों को मार गिराया था।

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इस मिशन की एक और दिलचस्प बात थी कि इसमें तेंदुए के मल-मूत्र का इस्तेमाल किया गया था। दरअसल, सेना के जवान जिस रास्ते से जा रहे थे, वहां काफी कुत्ते थे। ये बात पहले ही भारतीय सेना ने पता कर ली थी। इसलिए कुत्तों को शांत रखने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। कुत्ते तेंदुए से डरकर दूर भागते हैं। 

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पूरी रात जागते रहे पीएम मोदी
पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम में सर्जिकल स्ट्राइक की उस रात का जिक्र करते हुए बताया था कि मुझे वह रात हमेशा याद रहेगी। मैं पूरी रात जागता रहा। मेरी नजर मोबाइल पर टिकी हुई थी। 

नोट- खबर में इस्तेमाल की गईं सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं।

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