चाय एक ऐसा पेय है, जो अमीर-गरीब सब बड़े चाव से पीते हैं। चाय का इतिहास बड़ा पुराना है। आपको बता दें कि देश के 28 राज्यों में से 15 में चाय का उत्पादन होता है। चाय के कई फ्लेवर होते हैं। ग्रीन-टी, ब्लैक टी के अलावा व्हाइट टी भी लोग पसंद करते हैं। दुनिया में चाय की कहानी करीब 5000 साल पुरानी है। चीन में एक सम्राट थे शेन नुग्न। वो रोज सुबह टहलने के बाद बगीचे में बैठकर गर्म पानी पीते थे। एक दिन पानी में कुछ पत्तियां गिर गईं। उनके कर्मचारियों ने पानी फेंकने की कोशिश, लेकिन सम्राट ने उन्हें रोक दिया। उन्हें पानी से बढ़िया महक आ रही थी। सबकी बात को नकारते हुए सम्राट ने वो पानी पीया। उन्हें स्वाद बढ़िया लगा। ये पत्तियां चाय की थीं। ये तो हुई चाय की पुरातन कहानी, अब जानते हैं कुछ फैक्ट...
10 जनवरी, 1835 को भारत से चाय की पहली खेप इंग्लैंड पहुंची थी। इसके बाद चीन ने अंग्रेजों से व्यापारिक समझौता किया और उसे चाय के बीज दिए। अगर भारत की बात करें, तो यहां 50 किस्म की चाय पैदा होती है। हिमाचल प्रदेश, दार्जिलिंग और तमिलनाडु की चाय दुनियाभर में पसंद की जाती है।
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देश के जिन 15 राज्यों में चाय का उत्पादन होता है, वो हैं-असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय और नागालैंड।
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चाय को उसकी प्रोसेसिंग के आधार पर ग्रीन-टी, ओलोंग-टी, ब्लैक-टी और व्हाइट-टी आदि में बांटा गया है। 21 मई को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है।
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भारत के प्रमुख चाय बागान दार्जिलिंग- यह पश्चिम बंगाल का हिल स्टेशन है। यहां की चाय को काला चाय भी कहते हैं। इसकी सुगंध बेहद खास होती है। स्वाद और सुगंध के लिए जानी जाती है।
निलगिरी- यह तमिलनाडु का एक जिला है। यह पर्वत श्रृंखला तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल तक फैली है। यह चाय काले रंग, सुगंध और स्वाद के लिए जानी जाती है। कांगड़ा-यह हिमाचल प्रदेश का एक जिला है। इसका उत्पादन पालमपुर और धर्मशाला में होता है। मुन्नार-यह केरल का हिल स्टेशन है। यहां के चाय बागान केंद्रीय त्रावणकोर तक और केरल में फैले हुए हैं। कूर्ग- यह कर्नाटक का हिल स्टेशन है। इसे कोडागू भी कहते हैं। यहां की चाय भी बेहद प्रसिद्ध है।
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भारतीय चाय निर्यातक संघ (आईटीईए) के आंकड़े बताते हैं कि 2019 में लगभग 25.2 करोड़ किलोग्राम चाय का निर्यात हुआ था। कीनिया और अफ्रीकी चाय की कीमत भारत की चाय की तुलना में कम होने से दुनिया में इनकी डिमांड बढ़ रही है।
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वैसे यह भी कहा जाता है कि भारत में चाय की खोज सबसे पहले 1815 में हुई। कुछ अंग्रेज यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया। इसे स्थानीय कबाइली लोग पानी में उबालकर पीते थे।
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भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने 1834 में चाय की परंपरा भारत में शुरू करने और उत्पादन की संभावना तलाशने एक समिति का गठन किया था। इसके बाद 1835 में चाय के बागान लगाए गए।
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1841 से दार्जिलिंग चीनी किस्मों के चाय के पौधे उगा रहा है। यहां से चाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई की जाती है। इस चाय के लिए यहीं की मिट्टी उपयोगी है। दूसरी जगह यह चाय नहीं उग पाती।
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आपको पता है सफेद चाय क्या है?
यह एक नायाब किस्म है। इसमें कलियों के पूरी तरह खुलने यानी सफेद बाल आने से पहले उसकी पत्तियां तोड़ ली जाती हैं। यह जायके में कड़क नहीं होती। इसमें कैफीन कम और एंटीऑक्सीडेंट के गुण अधिक होते हैं।
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भारत में करीब 65 प्रतिशत लोग चाय पीते हैं। यह दर सालाना 3 प्रतिशत बढ़ रही है। सबसे बड़ी बात चाय निरंतर महंगी होती जा रही है, लेकिन इसकी कोई चर्चा नहीं करता। तो, यह तो पता ही चल गया हो कि भारत में चाय चीन से पहुंची। (चीन का एक ऐतिहासिक चित्र)
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