How QR Code Works: आज दुकान पर पेमेंट करनी हो, किसी वेबसाइट पर जाना हो, होटल का मेन्यू देखना हो या ट्रेन टिकट डाउनलोड करना हो, हर जगह QR Code यूज हो रहा है। ऐसे में सवाल आता है कि काला-सफेद डिब्बों वाला QR Code काम कैसे करता है? आइए जानते हैं...
QR Code का पूरा नाम Quick Response Code है। मतलब ऐसा कोड जिसे बहुत तेजी से पढ़ा जा सके। यह एक स्पेशल 2D Barcode होता है। इसमें काले और सफेद छोटे-छोटे चौकोर बॉक्स के रूप में इन्फॉर्मेशन हाइड रहती है। इसमें वेबसाइट का लिंक, मोबाइल नंबर, टेक्स्ट, ईमेल, लोकेशन, Wi-Fi पासवर्ड या पेमेंट की डिटेल स्टोर की जा सकती हैं।
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QR Code कैसे पढ़ता है आपका फोन?
जब आप अपने मोबाइल का कैमरा या QR Scanner किसी QR Code पर रखते हैं या दिखाते हैं, तो कैमरा उसकी पिक्चर लेता है। मोबाइल का सॉफ्टवेयर सबसे पहले QR Code के 3 बड़े चौकोर बॉक्स (Finder Patterns) को पहचानता है। ये बॉक्स बताते हैं कि कोड किस डायरेक्शन में रखा हुआ है। इसके बाद मोबाइल अन्य छोटे-छोटे काले और सफेद बॉक्स को रीड करता है। हर बॉक्स में डिजिटल इन्फॉर्मेशन होती है, जिसे सॉफ्टवेयर 0 और 1 (Binary Data) में चेंज करके समझता है। कुछ ही सेकंड में मोबाइल समझ जाता है कि QR Code में क्या डेटा है और उसी के अनुसार वेबसाइट खोल देता है, पेमेंट स्क्रीन दिखा देता है या अन्य जानकारी आपके सामने ला देता है।
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QR Code में इतनी सारी इन्फॉर्मेशन कैसे आती है?
QR Code में हजारों छोटे-छोटे बॉक्स होते हैं। हर बॉक्स एक डिजिटल पैटर्न का पार्ट होता है। इन्हीं पैटर्न की हेल्प से इन्फॉर्मेशन स्टोर की जाती है। बड़ी बात यह है कि अगर मान लीजिए QR Code का कोई छोटा पार्ट खराब भी हो जाए, तब भी उसे आसानी से स्कैन किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें Error Correction Technology होती है, जो अधूरे इन्फॉर्मेशन को भी काफी हद तक सही तरीके से पढ़ने में मदद करती है।
QR Code को स्कैन करने में सिर्फ कुछ सेकंड लगते हैं। इसे याद रखने की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन टिकट, बिजनेस कार्ड, रेस्टोरेंट मेन्यू, हॉस्पिट, स्कूल, रेलवे स्टेशन और गवर्नमेंट सर्विस तक में इसका यूज तेजी से बढ़ा है। UPI QR Code आने के बाद छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह QR Code से पेमेंट होने लगा है।
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QR Code स्कैन करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
हर QR Code सेफ नहीं होता है। साइबर अपराधी फेक QR Code लगाकर लोगों को फेक वेबसाइट पर भेज सकते हैं या धोखाधड़ी कर सकते हैं। इसलिए QR Code स्कैन करते समय क्रॉस चेक जरूर करें। स्कैन करने के बाद खुलने वाले लिंक को ध्यान से देखें और पढ़ें। बिना एक-दो बार वेरीफाई किए बिना किसी भी वेबसाइट पर अपनी पर्सनल या बैंक डिटेल्स फिल ना करें।
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QR Code से जुड़े आंकड़े
QR Code का आविष्कार 1994 में जापान की कंपनी Denso Wave ने किया था। इसका मकसद ऑटोमोबाइल पार्ट्स को तेजी से ट्रैक करना था।
एक QR Code सामान्य 1D बारकोड की तुलना में कई गुना ज्यादा इन्फॉर्शन स्टोर कर सकता है, इसलिए इसका उपयोग पेमेंट, टिकट और वेबसाइट लिंक जैसी कई सर्विस में होता है।
QR Code में Error Correction टेक्निक होती है। इसका कुछ हिस्सा खराब होने पर भी इसे स्कैन किया जा सकता है।
Content Source: Denso Wave, National Payments Corporation of India, QR Code.com, GS1– Barcode और QR Code के यूज के बारे में।
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