
CIBIL Score: अगर आपने कभी लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई किया है, तो CIBIL Score का नाम जरूर सुना होगा। यह एक 3 नंबर का स्कोर होता है, जो बताता है आपने पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड का पेमेंट टाइम से किया है या नहीं। सिंपल भाषा में CIBIL Score आपका क्रेडिट रिपोर्ट कार्ड है। लोन की EMI समय पर पेमेंट होगा या नहीं, सिबिल स्कोर की मदद से बैंक पता करता है।
1. टाइम पर EMI और क्रेडिट कार्ड का पेमेंट
अगर आप मंथली EMI और क्रेडिट कार्ड का बिल टाइम पर जमा करतते हैं, तो इसका पॉजिटिव इंपैक्ट आपके CIBIL Score पर पड़ता है। जैसे- पंकज ने बाइक लोन की सभी EMI टाइम पर जमा किया। इससे उसकी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत होगी और उसका स्कोर भी बेहतर होगा।
2. लेट पेमेंट से स्कोर कम हो सकता है
अगर EMI या क्रेडिट कार्ड का पेमेंट बार-बार लेट होता है या डिफॉल्ट हो जाता है, तो आपके स्कोर पर असर आएगा। जैसे- अगर किसी ने कई महीनों तक क्रेडिट कार्ड का मिनिमम पेमेंट भी नहीं किया, तो उसकी क्रेडिट प्रोफाइल पर निगेटिव इंपैक्ट पड़ेगा।
3. एक साथ कई लोन के लिए अप्लाई
कम समय में कई बैंकों या NBFC में लगातार लोन के लिए अप्लाई करने से क्रेडिट रिपोर्ट पर कई Hard Enquiries रजिस्टर होती है। इससे कुछ मामलों में बैंक रिस्क का अनुमान अलग तरीके से करते हैं।
4. कितना कर्ज पहले से चल रहा है
इनकम की तुलना में पहले से बहुत ज्यादा लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया है, तो बैंक यह भी देखता है। बैंक की नजर में नया लोन देने में रिस्क फैक्टर ज्यादा है।
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हां। अगर किसी इंसान ने पहले कभी लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया है, तो उसके पास क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होगी। ऐसे केस में कुछ बैंक और NBFC इनकम, जॉब, बैंकिंग लेनदेन और अदर फाइनेन्सियल डॉक्यूमेंट्स के बेस पर डिसीजन लेते हैं।
कॉन्टेन्ट सोर्सः TransUnion CIBIL, Reserve Bank of India, Experian, Equifax, CRIF High Mark.