Peepal Tree Benefits: साइंस में पीपल के पेड़ को Ficus Religiosa कहते हैं। पीपल भारत के सबसे पुराने और पूजनीय वृक्षों में गिना जाता है। इसे अंग्रेज़ी में Sacred Fig भी कहते हैं। भारतीय संस्कृति, हिंदू धर्म तथा पर्यावरण में इसका महत्व है।
हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बहुत पवित्र माना गया है। कई धार्मिक ग्रंथों में इसका जिक्र मिलता है। मान्यता है कि इस पेड़ में भगवान विष्णु का निवास होता है। कुछ परंपराओं में इसे भगवान ब्रम्हा, शिव और अन्य देवताओं से भी जोड़ा जाता है। इसी वजह से पीपल का पेड़ पूजनीय है। पूजा के साथ लोग पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाते हैं और परिक्रमा भी करते हैं।
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पीपल का पेड़ सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि गौतम बुद्ध को बिहार के महाबोधि मंदिर के पास एक पीपल के पेड़ (बोधि वृक्ष) के नीचे ज्ञान मिला था। इस वजह से इसे बोधि वृक्ष भी कहा जाता है।
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पीपल एक बड़ा और घना पेड़ है, जो पर्यावरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। यह हवा की क्वालिटी को बेहतर बनाने, छाया देने और पक्षियों व अन्य जीवों को फल देने और उनके रहने में पीपल के पेड़ की मुख्य भूमिका है। पीपल 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है।
पुराने समय में गांवों में पीपल के पेड़ के नीचे चौपाल लगती थी। इसकी घनी छाया लोगों को गर्मी से राहत देती थी। यही वजह है कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पीपल के पेड़ को नहीं काटना चाहिए। पर्यावरण की दृष्टि से भी बड़े और पुराने पेड़ों को बचाना चाहिए।
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पीपल का साइंस नाम Ficus religiosa है, इसे Sacred Fig भी कहते हैं।
बौद्ध परंपरा के अनुसार, गौतम बुद्ध को बोधि वृक्ष (पीपल) के नीचे ज्ञान मिला था।
पीपल सैकड़ों वर्षों तक जिंदा रह सकता है। कई पुराने पीपल आज भी मौजूद हैं।
यह पेड़ पक्षियों, कीटों और अनेक छोटे जीवों के रहने के लिए घर देता है।
पीपल को 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ने वाला पेड़ बताया गया है।
कॉन्टेन्ट सोर्सः
बता दें, भगवद गीता के अध्याय 10 में भगवान कृष्ण द्वारा वृक्षों में अश्वत्थ (पीपल) का जिक्र है।
Mahabodhi Temple – बोधि वृक्ष और गौतम बुद्ध से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल। Botanical Survey of India – भारतीय वृक्षों और वनस्पति संबंधी जानकारी।
Ministry of Environment, Forest and Climate Change– वृक्ष संरक्षण और पर्यावरण संबंधी जानकारी।
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