
हेल्थ डेस्क. कोरोना वायरस (Coronavirus)से छुटाकारा मिलने का नाम नहीं ले रहा है। यह किलर वायरस नए-नए रूप बदलकर हमला कर रहा है। नए वेरिएंट के सामने आने के बाद बीमारी के नए लक्षण भी सामने आए हैं। शुरुआत में कोरोना के लक्षण बुखार, खांसी, गले में खरास, गंध या स्वाद का जाना बताया जा रहा था। इसके बाद सिरदर्द, बंद नाक या फिर बहती नाक को भी लक्षण में शामिल किया गया था।लेकिन अब इसके नए चार अजीब लक्षण सामने आये हैं। जिसमें त्वचा से लेकर नाखून भी शामिल है। आइए जानते हैं कोरोना के चार नए लक्षण के बारे में।
1. त्वचा पर घाव या दाना होना
कोविड के लक्षण में त्वचा पर घाव भी जुड़ गया है। ब्रिटेन में साल 2021 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि कोरोना के 5 मरीजों में से एक के त्वचा पर चकत्ते दिखाई दिए इसके अलावा उसमें कोई और लक्षण नहीं देखा गया। कोविड कई तरह से त्वचा पर असर डाल सकता है। कुछ लोगों के स्किन पर दाग या दाने हो सकते हैं। जबकि अन्य में पित्ती यानी त्वचा में जलन के साथ दाने होने की समस्या हो सकती है। त्वचा से जुड़े कोविड के ज्यादातर लक्षण बिना किसी खास इलाज के कुछ दिन बाद खुद ठीक हो जाते हैं। वहीं कुछ मामलो में हफ्ता लगता है। अगर त्वचा में जलन या फिर दर्द होता है तो स्किन स्पेशलिस्ट से दिखाकर कोई क्रीम ले सकते हैं।
2. नाखून का रंग बदलना
हाथ के नाखून का बदरंग होना भी कोरोना का एक लक्षण हो सकता है। सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2 ) के दौरान हमारा शरीर प्राकृतिक तौर पर यह बताने की कोशिश करता है कि वो कितने दबाव में है। वो इसके लिए कई तरीके अपना सकता है। जिसमें नाखून भी शामिल है। कोरोना वायरस के चपेट में आने पर शारीरिक दबाव बढ़ता है और नाखून के जरिए भी बताने की कोशिश करता है। शारीरिक दबाव होने के कारण नाखूनों की वृद्धि में अस्थायी रुकावट आती है। जिसकी वजह से उंगलियों के नाखूनों पर क्षैतिज रेखाएं आती हैं। जिसका रंग नारंगी, सफेद हो सकता है।इतना ही नाखून गिरने भी लगते हैं। कोविड के नाखूनों से जुड़े लक्षणों के आंकड़ें अभी साफ नहीं हुए हैं। लेकिन अनुमान के मुताबिक एक से दो प्रतिशत कोविड मरीजों में यह लक्षण पाए जाते हैं।
3. बाल का झड़ना
बाल का झड़ना भी कोविड का लक्षण है। कोरोना संक्रमण के बाद एक महीने या उससे थोड़ा ज्यादा वक्त के लिए मरीज इससे सफर कर सकता है। स्टडी में सामने आया कि कोरोना पीड़ित रहे 6,000 लोगों में से 48 प्रतिशत में बाल झड़ने की समस्या पाई गई। ये उनमें ज्यादा रहा जो अधिक वक्त तक कोरोना से बीमार रहे।
4. सुनने की क्षमता पर असर पड़ना
कोरोना के एक लक्षण में सुनने की क्षमता पर असर भी देखा गया है। अन्य वायरल संक्रमणों की तरह जैसे कि फ्लू और खसरा,में कान के अदंरुनी कोशिकाओं पर असर पड़ता है। वैसे ही कोविड में भी यह देखने को मिला है। कोरोना में सुनने की क्षमता पर असर पड़ा या टिनिटस की समस्या हुई, जिसमें कान में लगातार आवाज गूंजने का अहसास होता रहता है। 560 कोरोना मरीजों पर किए गए अध्यन में पाया गया कि कोविड के 3.1 फीसदी मरीजों की सुनने की क्षमता चली गयी जबकि 4.5 फीसदी लोगों को टिनिटस की समस्या हुई। ज्यादातर रोगियों में यह समस्या खुद ब खुद दूर हो गई ।
क्यों दिखते हैं ये लक्षण
हालांकि अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि ये लक्षण क्यों दिखाई देते हैं। लेकिन सूजन की वजह से इसका असर होता है। सार्स-सीओवी-2 जैसे रोगजनकों के खिलाफ हमारे शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली के रूप में सूजन काम करती है। इसमें ‘साइटोकिन्स’ नामक प्रोटीन का उत्पादन होता है जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित करने में अहम होता है। कोरोना वायरस के कारण हुई सूजन के तौर पर प्रोटीन का अधिक उत्पादन होता है जिसकी वजह से कुछ लोगों की सुनने की क्षमता चली जाती है या फिर टिनिटस की समस्या पैदा होती है। इसमें छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं (tiny blood vessels)भी अवरुद्ध हो जाती है, जिसकी वजह से त्वचा और नाखूनों समेत कई अंगों पर रक्त पहुंचने में बाधा होती है। जिसकी वजह से यह लक्षण नजर आते हैं।
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