
India@75: जम्मू और कश्मीर के हिंदुओं और मुसलमानों ने एक साथ मिलकर भारत के स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लिया था। जम्मू और कश्मीर क्षेत्र पहले कई शासकों के अधीन रहा था। इसके विभिन्न रियासतों को अंग्रेजों द्वारा 1846 में अमृतसर संधि के तहत एक राज्य के तहत लाया गया था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने आधिपत्य के तहत हिंदू डोगरा समुदाय से आने वाले गुलाब सिंह को जम्मू और कश्मीर का महाराजा बनाया था।
मुस्लिम समुदाय के प्रभुत्व वाले क्षेत्र पर हिंदू राजा के हाथ में शासन देने से राज्य में मतभेद पैदा हो गए थे। 1925 में डोगरा राजघराने में उत्तराधिकार को लेकर गंभीर संघर्ष हुए। ऐसे में अंग्रेजों ने फिर से हस्तक्षेप किया और शाही परिवार के अन्य वर्गों के दावों की अनदेखी करते हुए हरि सिंह को नए महाराजा के रूप में नियुक्त किया।
हरि सिंह से नाराज था मुस्लिम समुदाय
हरि सिंह तानाशाह थे। वह उच्च वर्गों और उच्च जाति के हिंदुओं का पक्ष लेते थे। उनके राज में बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय को भेदभाव का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही किसानों और मजदूरों का शोषण किया जाता था, जिससे पूरे राज्य में आक्रोश और असंतोष था। इसी आक्रोश के चलते राज्य में 1930 के दशक में फतेह कदल रीडिंग रूम पार्टी नामक संस्था अस्तित्व में आई। इस संस्था का गठन शिक्षित मुस्लिम युवाओं ने किया था। इस संस्था से लोकप्रिय नेता के रूप में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का उदय हुआ था।
शेख अब्दुल्ला ने किया था नेशनल कांफ्रेंस का गठन
शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने बाद में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव से लड़ने के लिए मुस्लिम स्टेट कॉन्फ्रेंस नाम से एक सामाजिक संगठन बनाने की पहल की। उनके नेतृत्व में लोगों ने हरि सिंह सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद अब्दुल्ला ने मुस्लिम टैग हटाकर अपने संगठन का नाम नेशनल कांफ्रेंस रखा। उन्होंने इसे एक धर्मनिरपेक्ष समूह के रूप में पेश किया।
नेशनल कांफ्रेंस ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्थन से सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। इसी दौरान पंडित नेहरू अब्दुल्ला के करीबी दोस्त बन गए। पंडित नेहरू खुद कश्मीरी थे। 1946 में अब्दुल्ला ने हरि सिंह के खिलाफ कश्मीर छोड़ो आंदोलन शुरू किया था। हरि सिंह जम्मू-कश्मीर के स्वतंत्र भारत में शामिल होने के खिलाफ थे।
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हरि सिंह ने जारी किया था नेहरू को गिरफ्तार करने का आदेश
आंदोलन के चलते अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया था। नेहरू बैरिस्टर के रूप में कोर्ट में अपने दोस्त का केस लड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। नेहरू जब श्रीनगर जा रहे थे तब हरि सिंह ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। इसके कारण पूरे देश में व्यापक विरोध हुआ था। स्वतंत्रता की सुबह के साथ ही पाकिस्तान समर्थक बलों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। पराजित और असहाय, हरि सिंह ने भारत की मदद मांगी। भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया और हरि सिंह ने अपने राज्य को भारतीय संघ में शामिल कर लिया।
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