कुंडली में सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनता है राज राजेश्वर योग, देता है ये शुभ फल

Published : Mar 21, 2021, 03:21 PM IST
कुंडली में सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनता है राज राजेश्वर योग, देता है ये शुभ फल

सार

वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली में बनने वाले अनेक शुभ योगों के बारे में बताया गया है। ऐसा ही एक शुभ योग है राज राजेश्वर। यह योग एक प्रकार का राजयोग है।

उज्जैन. जिस व्यक्ति की कुंडली में राज राजेश्वर योग होता है उसके पास धन, संपत्ति, ऐश्वर्य, भोग विलास के तमाम साधन होते हैं और वह राजाओं के समय जीवन व्यतीत करता है। ऐसा व्यक्ति सूर्य के प्रभाव से विश्व में ख्याति अर्जित करता है, वहीं चंद्र के कारण बहुत अच्छे स्वभाव का मालिक भी होता है।

मिलते हैं ये शुभ फल
इस योग के प्रभाव से व्यक्ति बुद्धिमान और रचनात्मक होता है। सरकारी नौकरी में बड़े पदों पर भी राज राजेश्वर योग वाला देखा गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में राज राजेश्वर योग होता है उसका पारिवारिक जीवन भी अत्यंत सुखद होता है और वह परिजनों के साथ खुशनुमा जिंदगी व्यतीत करता है। जीवन के हर क्षेत्र में उसे सफलता और मान-सम्मान मिलता है।

कैसे बनता है राज राजेश्वर योग?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार राज राजेश्वर योग तब बनता है जब जन्मकुंडली में बृहस्पति की राशि मीन में सूर्य हो और चंद्र स्वराशि कर्क में हो। दोनों ग्रह शुभ स्थिति में हो और कुंडली के चौथे, आठवें और 12वें भाव में ना हो।

इसे योग के फायदा पाने के लिए करें ये उपाय…
1.
राज राजेश्वर योग के पूर्ण लाभ के लिए सूर्य और चंद्र को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। सूर्य की शक्ति का उपयोग करने के लिए रोज सूर्य को जल अर्पित करें और आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ नियमित करें।
2. लाल चंदन की माला गले में धारण करके रखें। ज्योतिषी की सलाह से सोने में माणिक भी धारण किया जा सकता है।
3. चंद्रमा से शुभ फल पाने के लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें। प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर सफेद चंदन से ऊं लिखकर एक मुठ्ठी चावल अर्पित करें।
4. सोमवार को सफेद कपड़े पहनें। सोमवार को रात्रि के समय दूध, दही, चावल का सेवन न करें।

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