
दिवाली का त्यौहार मिठाइयों और पकवानों के बिना अधूरा माना जाता है। जहां एक तरफ बच्चे फटाखे छोड़ते हैं, वहीं दूसरी तरफ माताएं और बहनें घर में पारंपरिक पकवान बनाते और बाजार से खरीदकर लाते हैं। भारत के हर राज्य में दिवाली पर खास और पारंपरिक मिठाइयाँ बनती हैं, जो अलग-अलग स्वाद और खुशबू से भरी होती हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक इन 20 मिठाइयों के बिना दिवाली अधूरी मानी जाती है। सभी राज्यों में लोग अपने यहां की पारंपरिक मिठाई बनाते हैं, ऐसे में चलिए दीवाली के इस खास अवसर पर हमारे देश के इन पारंपरिक मिठास के बारे में जानते हैं।
बेसन, बूंदी, नारियल और मोतीचूर के लड्डू दिवाली पर हर घर में मिलते हैं। बेसन के लड्डू खासतौर पर घी और इलायची के स्वाद के कारण लोकप्रिय हैं और दीवाली पर जरूर बनाए जाते हैं।
सूखे मेवों, मावा और चीनी से भरी हुई यह मिठाई बेहद खास और स्वादिष्ट होती है। इसकी कुरकुरी बनावट और मीठी फिलिंग इसे दिवाली की खास मिठाइयों में शामिल करती है।
दूध और चीनी से बने इस मिठाई का स्वाद नर्म और मीठा होता है। इसे विशेष रूप से खोया और इलायची के साथ सजाया जाता है।
काजू, पिस्ता, नारियल और दूध से बनी बर्फी दिवाली की पारंपरिक मिठाई है। इसकी चिकनी और मलाईदार बनावट सबको पसंद आती है। इसके बिना दिवाली की मिठास अधूरी है।
गेहूं के आटे, घी, सूखे मेवे और चीनी से बनी पंजिरी को दिवाली पर शुभ माना जाता है। यह मिठाई ऊर्जा और पोषण से भरपूर होती है। सर्दियों में यह खास तौर पर बनाया जाता है।
सफेद, नर्म और रस से भरी हुई यह बंगाली मिठाई छेना से तैयार चाशनी में डूबी होती है। दिवाली पर इस मिठाई का मिठास सबके दिलों को जीत लेता है।
पनीर और चीनी से बनी इस पारंपरिक बंगाली मिठाई में इलायची का स्वाद होता है। यह नर्म, हल्की और कम मीठी होती है, जो दिवाली के अलावा और अन्य अवसरों में बहुत पसंद किया जाता है।
दूध, चीनी और मैदा आटे से बने घेवर पर केसर और मावा का लेयर डाला जाता है। यह राजस्थानी मिठाई ताजगी और स्वाद का एहसास कराती है।
मालपुआ को आटे और मावा से बनाया जाता है और इसे चाशनी में डुबोकर परोसा जाता है। यह मिठाई अपनी खास सुगंध और स्वाद के कारण दिवाली पर लोकप्रिय है।
बेसन, घी और चीनी से बनी यह दक्षिण भारत की मिठाई अपनी मक्खन जैसी बनावट और समृद्ध स्वाद के लिए जानी जाती है।
दक्षिण भारत में बेहद लोकप्रिय मैसूर पाक घी, बेसन और चीनी से बनता है। इसका स्वाद दिवाली के समय का विशेष आकर्षण होता है।
चावल के आटे और गुड़ से बने ये मीठे पकवान तले जाते हैं और दीवाली पर खासतौर से बनाए जाते हैं। इसकी गाढ़ी बनावट और मधुर स्वाद सबको भाता है।
चावल के आटे से बने और गुड़ व नारियल से भरे हुए कोझुकट्टई को दिवाली पर बहुत पसंद किया जाता है। ये पकौड़ी जैसी दिखने वाली मिठाई चावल और गुड़ की मिठास से भरी होती है।
यह मीठा पकवान चना दाल, गुड़ और नारियल से बनाया जाता है। इसकी हल्की मिठास और पोषक तत्व दिवाली की मिठाइयों में इसे खास बनाते हैं।
चावल के आटे, केले और गुड़ से बने नीयप्पम को केरल में दिवाली और ओणम के अवसर पर बनाया जाता है। यह कुरकुरी और हल्की मिठाई सभी को पसंद आती है।
दूध और चीनी से बने धारवाड़ पेडा का हल्का चॉकलेट जैसा स्वाद और गाढ़ी बनावट इसे दिवाली की खास मिठाई बनाती है।
गेहूं के दूध और घी से बना यह हलवा दक्षिण भारत में विशेष रूप से दिवाली के अवसर पर तैयार किया जाता है। इसका गाढ़ा और मलाईदार स्वाद दिवाली के आनंद को बढ़ा देता है।
छोटे-छोटे बूंदी के मोतीचूर लड्डू महाराष्ट्र में दिवाली पर जरूर बनाए जाते हैं। ये लड्डू दिखने में सुंदर और खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं।
घी, आटा और चीनी से बने शंकरपाले को तलकर कुरकुरा बनाया जाता है। यह महाराष्ट्र में दिवाली की एक खास पारंपरिक मिठाई है।
पतली, पारदर्शी चावल के आटे की परतों में चीनी, घी और सूखे मेवे भरे जाते हैं। आंध्र प्रदेश की यह मिठाई स्वाद में हल्की, कुरकुरी और बेहद खास होती है।
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