
Chhath Puja Daura Samgri: छठ पूजा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला सबसे पवित्र महापर्व है, जो सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। यह त्योहार प्रकृति, जल, वायु और सूर्य की ऊर्जा के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक त्योहार है। छठ के दौरान व्रती न तो नमक खाते हैं, न ही किसी तरह के तामसिक चीजों सेवन करते हैं। पूजा में उपयोग की जाने वाली हर चीज का गहरा धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है, खासकर डाला या दौरा में रखी जाने वाली सब्जियां और फल, जो शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माने है। बहुत से लोगों को यह नहीं पता कि छठ पूजा के डाला में क्या चीजें रखना है, इसमें रखी जाने वाली चीजों का महत्व। ऐसे में आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।
छठ पूजा के डाले में हमेशा ताजी, बिना कटे-फटे और शुद्ध सब्जियां रखी जाती हैं। इसमें मुख्य रूप से लौकी, कद्दू, गागर नींबू, बैंगन, मूली, अरवी, और हरा धनिया जैसी देसी सब्जियां शामिल होती हैं। इन सब्जियों का चयन उनके प्राकृतिक रूप और शुद्धता के कारण किया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि छठी मैया को “प्राकृतिक रूप में अर्पित की गई वस्तुएं” अधिक प्रिय होती हैं। लौकी और कद्दू को पवित्रता और ठंडक का प्रतीक माना जाता है, वहीं मूली और अरवी जैसी जड़ वाली सब्जियां धरती से जुड़ाव और स्थायित्व का प्रतीक हैं।
छठ पूजा के दौरान फलों की भी विशेष भूमिका होती है। डाला में रखा गया हर फल एक खास संदेश देता है। इसमें आमतौर पर केला, नारियल, अमरूद, सेब, शरीफा, संतरा, नींबू, मौसमी, गन्ना और सिंघाड़ा जैसे फल शामिल होते हैं। केला स्थायित्व और परिवार की वृद्धि का प्रतीक है, जबकि नारियल पवित्रता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। गन्ना छठ पूजा का सबसे जरूरी हिस्सा होता है, क्योंकि इसे सूर्य की ऊर्जा और मिठास का प्रतीक माना जाता है। अमरूद और सेब स्वास्थ्य और समृद्धि के प्रतीक हैं, वहीं सिंघाड़ा का फल आध्यात्मिक शुद्धता और देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
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छठ पूजा में कृत्रिम या पैक्ड चीजों की जगह हमेशा देसी और प्राकृतिक वस्तुएं चुनी जाती हैं। डाला में रखी गई हर वस्तु बिना किसी मिलावट और पूरी श्रद्धा से तैयार की जाती है। ये सब्जियां और फल सूर्य देव को अर्पित करने से पहले पवित्र जल से धोए जाते हैं। व्रती इस पूजा को शुद्ध मन, शरीर और विचारों से करते हैं, इसलिए हर वस्तु की शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
डाला में रखी गई ये वस्तुएं केवल भोग या प्रसाद नहीं होतीं, बल्कि यह प्रकृति के आशीर्वाद के प्रति आभार का प्रतीक होती हैं। सूर्य की रोशनी से जो कुछ धरती पर पनपता है, वही अन्न, फल और सब्जियां छठी मैया को अर्पित की जाती हैं। इस तरह छठ पूजा मानव और प्रकृति के अटूट संबंध को दर्शाती है।
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डाले में लौकी, कद्दू, मूली, बैंगन, अरबी, हरा नींबू, हरा धनिया और गन्ना जैसी देसी सब्जियां रखी जाती हैं।
डाला में केला, नारियल, अमरूद, सेब, संतरा, मौसमी, बेल और शरीफा जैसे फल रखे जाते हैं, जो सूर्य देव को अर्पित किए जाते हैं।
गन्ना सूर्य देव का प्रिय फल माना जाता है, जो मिठास और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक है। इसे डाले के दोनों ओर खड़ा रखा जाता है, जिससे यह पूजा का अहम हिस्सा बनता है।
नहीं, छठ पूजा पूरी तरह सात्विक होती है, इसलिए इसमें प्याज, लहसुन या किसी भी दूसरे तामसिक वस्तुओं का उपयोग वर्जित है।
पूजा के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में परिवार और पड़ोसियों में बांटा जाता है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का वास होता है।
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