
फूड डेस्क: शरद पूर्णिमा का पावन पर्व इस बार 16 अक्टूबर 2024, बुधवार के दिन मनाया जा रहा है। हालांकि, शरद पूर्णिमा पर इस बार चंद्र ग्रहण का साया भी रहने वाला है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और इस दिन चंद्रमा से अमृत की बरसात होती है, इसलिए चंद्रमा की रोशनी में खीर का भोग रखने का विशेष महत्व होता है और कहते हैं कि चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने से यह अमृत के समान हो जाती है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने का क्या महत्व है और आप किस तरह से शरद पूर्णिमा की खीर बना सकते हैं।
क्यों बनाई जाती है शरद पूर्णिमा पर खीर
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाने का विशेष महत्व होता है। यह खीर दूध, चावल, ड्राई फ्रूट्स और चीनी के साथ बनाई जाती है। दरअसल, चंद्रमा को दूध का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण इस दिन दूध की खीर बनाई जाती है। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन दूध चावल की खीर बनाने से लोगों को आरोग्य रहने का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन सात्विक तरीके से चावल की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में पूरी रात रखा जाता है। इसके बाद अगली सुबह इस खीर का सेवन घर के सभी लोग करते हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे आप शरद पूर्णिमा पर चावल की स्वादिष्ट और सात्विक खीर बना सकते हैं।
खीर बनाने की सामग्री
1 लीटर फुल क्रीम दूध
1/4 कप बासमती चावल (धोकर 20 मिनट तक भिगोये हुए)
1/2 कप चीनी (स्वादानुसार)
1/4 चम्मच इलायची पाउडर
8-10 बादाम (कटे हुए)
8-10 काजू (कटे हुए)
8-10 पिस्ता (कटे हुए)
केसर के 8-10 धागे
1 बड़ा चम्मच घी
1/4 कप किशमिश
चांदी का वर्क (ऑप्शनल, गार्निश के लिए)
ऐसे बनाएं शरद पूर्णिमा पर खीर
- एक भारी तले वाले पैन में दूध डालें और मीडियम आंच पर उबाल लें। इसे तले पर चिपकने से रोकने के लिए बीच-बीच में हिलाते रहें।
- जब दूध उबलने लगे तो भीगे हुए चावल पैन में डाल दें। इसे धीमी आंच पर तब तक पकने दें जब तक कि चावल पूरी तरह से पक न जाए। जलने से बचाने के लिए बीच-बीच में इसे हिलाते रहें।
- एक बार जब चावल पक जाए और दूध गाढ़ा हो जाए, तो चीनी, इलायची पाउडर और केसर के धागे डालें। अच्छी तरह मिलाएं और चीनी को पूरी तरह घुलने दें।
- एक छोटे पैन में घी गर्म करें और उसमें बादाम, काजू और किशमिश को गोल्डन ब्राउन होने तक हल्का भून लें। इन तले हुए मेवों को खीर में डाल दीजिए।
- खीर को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए 5-10 मिनट तक उबलने दें। दूध एकदम मलाईदार होना चाहिए और चावल नरम होना चाहिए।
- जब खीर तैयार हो जाए तो इसे आंच से उतार लें और ठंडा होने दें। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों को अवशोषित करने के लिए खीर को पारंपरिक रूप से कुछ घंटों के लिए चांदनी में रखा जाता है, ऐसा माना जाता है कि इससे इसके गुण बढ़ जाते हैं।
परोसने से पहले कटे हुए पिस्ता, बादाम और सिल्वर वर्क से सजाएं।
ध्यान दें: शरद पूर्णिमा की रात को बनाई गई खीर अक्सर अगली सुबह खाई जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि खीर रात भर रखी रहने पर शीतलता देती है और सेहत के लिए फायदेमंद होती है।
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