
बाजार की मिलावटी सब्जियों और कलरफुल फलों से तंग आकर अब लोग धीरे-धीरे गार्डनिंग की तरफ बढ़ रहे हैं। आजकल किचन गार्डनिंग से टेरिस में फूल-सब्जी लगाने का ट्रेंड है। थोड़ी सी मेहनत में सिर्फ केमिकल फ्री उत्पाद नहीं मिलता बल्कि घर की हवा भी शुद्ध रहती है। अगर आप भी घर पर पहली बार खेती करने का प्लान बना रहे हैं लेकिन समझ नहीं आ रहा क्या उगाएं तो ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे कई फल और सब्जियां जो कम समय में उगने के साथ स्वाद कमाल का देती हैं। इसी कड़ी में हम लेकर आए हैं, लाल रसीली और सेहत से भरपूर रसबेरी\ रसभरी को उगाने का तरीका, जो केवल 90 दिनों में फल देने लगती है।
बाजार में तरह-तरह की रसबेरी के बीज मौजूद हैं लेकिन घर में उगाने के लिए आप गोल्डन या लाल रसबेरी चुन सकते हैं। यह आसानी से फल देने के साथ छोटे से बैग में लगाई जा सकती है।
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रसभरी के बीज नर्सरी में मिलने के साथ ही घर पर भी बनाए जा सकते हैं। पकी हुई रसभरी के बीज निकालकर सूखने रख दें,धीरे-धीरे इनका अंकुरण होना लगेगा।
पौधा कोई भी हो, जबतक मिट्टी का अनुपात सही नहीं होगा फूल और फल नहीं आएंगे। रसभरी को आप 12 से 15 इंच के गमले ये ग्रो बैग में लगाएं। सॉयल बनाने के लिए 35 प्रतिशत दोमट मिट्टी, 35% खाद और 30 फीसदी रेस का इस्तेमाल करें। ध्यान रहे मिट्टी जल निकासी वाली ही होनी चाहिए, वरना सारी मेहनत बर्बाद जा सकती है। इसमें बीज लगाकर पौधों को खिलने दें।
रसभरी को हर रोज धूप की आवश्यकता होती है। आप इसे 6-8 घंटे की डायरेक्ट सनलाइट में रखें, इसके लिए बालकनी, छत बेस्ट है। धूप में रखकर पौधे को छोड़ना नहीं है,बल्कि मिट्टी का ध्यान रखें। इसे नमी ज्यादा पसंद होती हैं। ऐसे में आप 1-2 इंच मिट्टी सूखने पर पानी दें, हर 20 दिन में वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करें। अगर फूल आ गए हैं तो खाद के तौर पर केले के छिलकों का इस्तेमाल करें, इससे फल बेहतर बनते हैं।
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रसभरी का पौधा तेजी से बढ़ता है, इसलिए इसे सहारे की आवश्यकता होती है। पौधी की लंबाई 2-6 फीट तक हो सकती है। ऐसे में पत्तियों को सहारा देना फल के लिए बास की लकड़ी या इस्तेमाल करें। बीज लगाने के बाद लगभग 60 से 80 दिनों में फल आने लगते हैं। अगर आपके पौधे पर रसभरी का हस्क भूरा हो गया है तो ये फूल बिल्कुल तैयार है।
भारत में रसभरी की कीमत, उसके सीजन और उपलब्धता पर निर्भर करती है। सर्दियों से लेकर अप्रैल तक का ये सीजन बेस्ट माना जाता है। मंडी में यह 150-300रु तक किलो और ऑनलाइन स्टोर्स पर पैकेट के अनुसार ये 500-600रु. तक जा सकती है।
भारत में रसभरी को मकोई, पोपटी, चिरबोटी, टेंटारी, पोपटान जैसे नामों से भी जाना जाता है।
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