
केंद्र सरकार ने कफ सीरप को लेकर सख्य नियम बना दिए हैं। सीरप की ब्रिकी को नियंत्रित करने के लिए औषधि नियम, 1945 में एक नया संशोधन किया है। इस नए रूल के तहत कंज्यूमर फार्मेसियों से बिना डॉक्टर के पर्चे के कफ सीरप नहीं खरीद पाएंगे। यह सख्त कदम मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित कफ सीरप पीने से 22 बच्चों की मौत की घटना के कुछ समय बाद उठाया गया है। जानिए इसके बारे में अधिक जानकारी।
9 जून, 2026 की यह अधिसूचना आने के बाद अधि सूचना संशोधन के तहत औषधि नियमों की अनुसूची K में सूचीबद्ध दवाओं से "सिरप" शब्द को भी हटा दिया गया है। इस नए नियम के कारण बिना प्रिस्क्रिप्शन के सिरप की उपलब्धता समाप्त हो गई है। अब तर ओवर द काउंटर दवा के रूप में कफ सीरप धड़ल्ले से खरीदे जा रहे थे लेकिन अब ऐसा संभव नहीं हो पाएगा। वहीं खांसी की गोलियां, टैबलेट या लॉज़ेंज को अभी भी मेडिकल स्टोर से खरीदा जा सकता है।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव हर्ष मंगला द्वारा जारी कि देश भर की फार्मेसियों को सिरप और संबंधित उत्पादों की बिक्री को नियंत्रित करने वाले संशोधित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अब तक मेडिकल स्टोर से कफ सिरप, जैसे कि बेनाड्रिल, ग्लाइकोडिन, ज़ेडेक्स, टस्क डीएक्स, ग्रिलिंक्टस, कॉफसिल्स, हिमालय कॉफलेट, डाबर हनीटस आदि खरीदना बेहद आसान था। जब डॉक्टर किसी को पर्चे में ये दवा लिखेंगे, आप तभी इन कफ सीरप को मेडिकल स्टोर से खरीद पाएंगे। चूंकि कड़े नियम बन गए है, तो ऐसे में धड़ल्ले से बिकने वाले कफ सीरप की बिक्री में भी कमी देखने को मिलेगी।
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