हेल्थ डेस्क: हमारे शरीर में पानी की एक निश्चित मात्रा होनी चाहिए। इससे कम होने पर पेशाब गहरे पीले रंग का हो जाता है और ज़्यादा पानी पीने पर यह सफेद रंग के करीब हो जाता है। ज़्यादा पानी पीने से किडनी की क्षमता प्रभावित होती है। जितनी प्यास लगे, उतना ही पानी पीना चाहिए। जब शरीर को पानी की ज़रूरत होती है, तो हमारा दिमाग हमें संकेत देता है।
पसीना ज़्यादा आने पर या ज़्यादा शारीरिक काम करने पर शरीर को ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है। कुछ लोगों को पानी देखते ही पीने का मन करता है, यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या है। ऐसे में बेवज़ह पानी नहीं पीना चाहिए। किडनी के लिए एक निश्चित पानी की मात्रा होती है, उससे ज़्यादा पानी पीने पर बार-बार पेशाब आता है।
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पानी पीते ही पेशाब आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए हम दिन में 1.5 लीटर से 3 लीटर तक पानी पीने की सलाह देते हैं। ज़्यादा काम करने या पसीना आने पर शरीर खुद पानी मांगता है, तब पानी पीना चाहिए। लेकिन बेवज़ह पानी पीने से किडनी की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जो आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है। किडनी को फिर से ठीक करना मुश्किल होता है।
ज़्यादा पानी पीने से एक और समस्या यह होती है कि शरीर में सोडियम का स्तर कम हो जाता है। पानी की मात्रा ज़्यादा और सोडियम जैसे लवण कम होने पर यह दिमाग समेत कई अंगों पर बुरा असर डालता है। इसलिए ज़्यादा पानी नहीं पीना चाहिए।
कम पानी पीने से भी समस्याएं होती हैं। शरीर से रोज़ाना कम से कम 500 मिलीलीटर पेशाब निकलना चाहिए। इससे कम होने पर शरीर से गंदगी ठीक से नहीं निकल पाती। हम जो खाना खाते हैं, उससे विषाक्त पदार्थ बनते हैं। ये पदार्थ बाहर नहीं निकलने पर शरीर के लिए समस्या पैदा करते हैं।
कम पानी पीने से किडनी में पथरी होने की संभावना बढ़ जाती है। शरीर में बनने वाले विषाक्त पदार्थ और लवण बाहर नहीं निकल पाते और किडनी में पथरी बन जाते हैं। विषाक्त पदार्थों को घुलने के लिए पानी ज़रूरी है। इसलिए एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज़ाना 1.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए। बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी की मात्रा तय करनी चाहिए।
किडनी स्टोन होने पर ज़्यादा पानी और कुछ अन्य समस्याओं में कम पानी पीने की सलाह दी जाती है। इसलिए स्वस्थ और बीमार व्यक्ति के लिए पानी की मात्रा अलग-अलग होनी चाहिए' ऐसा डॉ. विद्या शंकर ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया है।
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