
हेल्थ डेस्क: साल 2025 का बजट (Health Budget 2025) पेश कर दिया गया है। सरकार ने बजट में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में इस्तेमाल होने वाली 36 दवाओं की कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी है। साथ ही सभी जिला अस्पताल में कैंसर डे केयर सेंटर शुरू करने की बात कही गई। कैंसर दवाएं सस्ती होने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बहुत फायदा पहुंचेगा। साथ ही लोगों को फाइनेंसियल ट्रॉमा से नहीं गुजरना पड़ेगा। अक्सर लोगों के मन में ये बात बनी रहती है कि कैंसर की शुरुआती बीमारी को क्या सिर्फ दवाओं से ठीक किया जा सकता है? आईए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
कैंसर के शुरुआती लक्षण दिखने पर डॉक्टर कैंसर की स्टेज का पता करते हैं। कैंसर स्टेज के हिसाब से डॉक्टर सर्जरी या फिर दवाओं के माध्यम से बीमारी ठीक करते हैं। कई बार कैंसर की दवाएं ही बीमारी को पूरी तरह से ठीक करने में सक्षम होती हैं। शुरुआती लक्षण में केवल दवाएं ही बीमारी को जड़ से खत्म कर देती हैं। जानिए कैसे कैंसर पेशेंट को दवाएं दी जाती हैं।
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इंजेक्शन के रूप में: कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए कीमोथेरिपी की जरूरत पड़ती है। दवाओं को शरीर के अंदर इंजेक्शन की मदद से पहुंचाया जाता है। नस में ड्रिप लगाकर कुछ समय अंतराल में दवाएं दी जाती हैं।
मौखिक सेवन: कैंसर के उपचार के दौरान शरीर में कई साइड इफेक्ट भी नजर आते हैं। उन्हें दूर करने के लिए भी दवाओं का सेवन करना पड़ता है। कुछ कैंसर की दवाएं भी मौखिक सेवन के माध्यम से ली जाती हैं।
यानी कैंसर की बीमारी को सिर्फ दवाओं की मदद से भी पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। 2025 का बजट स्वास्थ्य के लिहाज से कैंसर पेशेंट्स के लिए वरदान है।
बजट में कैंसर की दवाओं को सस्ता कर लोगों की बड़ी राहत दी गई है। हर साल कैंसर के पेशेंट देश में बढ़ रहे हैं। साल 2023 में कैंसर के मामले 14,96,972 थे। अगर शुरुआती स्टेज में कैंसर डायग्नोज हो जाए तो सस्ते इलाज से भी इसे ठीक किया जा सकता है।
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