
देशभर में कम से अधिक उम्र तक के लोगों में अचानक से हार्ट अटैक के कई केस देखने को मिल रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया में इस बात को हवा दी जा रही है कि कोरोना वैक्सीनेशन के कारण लोगों को हार्ट अटैक आ रहे हैं। इससे संबंधित कई रिसर्च देश-दुनिया में हुई हैं।
जयदेव हॉस्पिटल बेंगलुरु के निदेशक डॉ. के.एस.रवींद्रनाथ की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति ने हेल्थ डिपार्टमेंट को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कहा गया है कि राज्य में युवाओं में अचानक होने वाले दिल के दौरे और हार्ट संबंधी समस्याएं कोरोना संक्रमण या कोविड वैक्सीनेशन के कारण नहीं हैं।
कोविड-19 पेंडेमिक के बाद दिल के दौरे या हार्ट अटैक से मरने वाले युवाओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर, राज्य सरकार ने कोविड संक्रमण और टीकाकरण के दुष्प्रभावों का अध्ययन करने के लिए फरवरी में डॉ. के.एस.रवींद्रनाथ के नेतृत्व में दस एक्सपर्ट की एक कमेटी बनाई थी।
कमेटी ने 1 अप्रैल से 31 मई तक जयदेव हॉस्पिटल में भर्ती 251 हार्ट पेशेंट्स पर स्टडी की और निष्कर्ष निकाला कि "हृदय संबंधी समस्याएं तत्काल अवधि में कोरोना या सूजन के कारण हो सकती हैं। हालांकि, महामारी कम होने के एक साल बाद भी, इस तरह के कोई सबूत नहीं मिले हैं जिनसे प्रूफ हो सके कि कोविड वैक्सीन के कारण हृदय संबंधित समस्याएं होती हैं। महामारी समाप्त हुए तीन साल बीत चुके हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में किए गए किसी भी स्टडी ने यह साबित नहीं किया है कि अचानक दिल का दौरा कोरोना के कारण हो रहा है।
जो लोग रात में देर से सोते हैं उन्हें दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक होती है! कुल मिलाकर, कम उम्र के लोगों में दिल के दौरे के मामले देखे गए हैं। यह कोविड के बाद बदले स्वास्थ्य और जीवनशैली के कारण हो सकता है। इसने लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस संबंध में कई एहतियाती कदम उठाने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड के बाद हार्ट डिजीज के रिस्क फैक्टर जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा, बढ़ गए हैं। उदाहरण के लिए, 2019 और 2025 के बीच 40 वर्ष की आयु के हृदय रोगियों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि डायबिटीज का प्रसार 13.9% से बढ़कर 20.5%, हाई ब्लड प्रेशर 13.9% से बढ़कर 17.6%, मोटापा 34.8% से बढ़कर 44.1%, धूम्रपान 48.8% से बढ़कर 51%, जेनेटिक हिस्ट्री 11.6% से बढ़कर 14.7% हो गया है।
हार्ट संबंधी जांच स्कूल स्तर पर शुरू होनी चाहिए। दसवीं कक्षा या पंद्रह साल की उम्र से ही चिकित्सीय जांच करवानी चाहिए। हृदय संबंधी समस्याओं, उच्च रक्तचाप, मोटापे, इंसुलिन की समस्या और वंशानुगत बीमारियों की जांच कम उम्र में ही करवानी चाहिए। इस संबंध में एक जन स्वास्थ्य अभियान चलाया जाना चाहिए। सुझाव दिया गया है कि हेल्दी फूड्स और हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देकर हार्ट संबंधी समस्याओं को रोका जा सकता है।
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251 मरीजों में से लगभग सभी 249 को कोविड-19 का टीका लग चुका है। इनमें से 53 को सिर्फ एक खुराक, 180 को दो खुराक और 17 को तीन खुराकें मिली हैं। 144 को कोविशील्ड और 64 को कोवैक्सीन का टीका लगा है। हालांकि, 52 को यह नहीं पता कि उन्हें कौन सा टीका लगा है।
एक विशेषज्ञ पैनल ने कोविड-19 संक्रमण और टीकाकरण इतिहास तथा अचानक हार्ट संबंधी घटनाओं के बीच संबंध का अध्ययन करने के लिए सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लेखों, क्लीनिकल स्टडी और क्लीनिकल रजिस्ट्रियों की समीक्षा की है। दुनिया भर में प्रकाशित अधिकांश अध्ययनों और रिपोर्टों ने भी कोविड-19 टीकाकरण और अचानक हार्ट संबंधी घटनाओं के बीच कोई संबंध साबित नहीं किया है। इसके बजाय, रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 टीकाकरण लंबे समय में हार्ट संबंधी घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
युवाओं में हार्ट अटैक और हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मृत्यु की घटनाओं पर नजर रखने के लिए एक हार्ट डिजीज मॉनिटरिंग प्रोग्राम लागू किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय पंजीकरण शुरू किया जाना चाहिए।
1.बच्चों की हार्ट डिजीज सहित विभिन्न बीमारियों की जांच स्कूल स्तर पर 10वीं कक्षा या 15 वर्ष की आयु से ही की जानी चाहिए।
2. हार्ट डिजीज, उनके कारणों, जोखिम कारकों, शीघ्र पहचान, तथा ट्रीटमेंट करना, आहार और लाइफस्टाइल में बदलाव के बारे में जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए स्वास्थ्य अभियान चलाए जाने चाहिए।
3. फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ावा देना, धूम्रपान छोड़ना, डिजिटल डिवाइस देखने का समय कम करना और पर्याप्त नींद को प्राथमिकता देना।
4. चीनी और नमक का सेवन कम करना, स्ट्रेस मैनेजमेंट करना।
अचानक हार्ट की बीमारियों से मृत्यु में वृद्धि का कोई स्पेसिफिक कारण नहीं है। हालांकि कोविड के बाद के दौर में हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि कोविड ही इसका कारण है। कोविड संक्रमण और टीकाकरण के लॉन्ग साइडइफेक्ट्स पर बड़े पैमाने पर अध्ययन और शोध की आवश्यकता है। विशेषज्ञ कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि इस संबंध में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) जैसे संस्थानों को स्टडी करनी चाहिए।
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