
सर्दियों की सुबहों में अलार्म बार-बार स्नूज करना लगभग हर किसी की आदत बन जाती है। चाहे रात भर की नींद पूरी हो, फिर भी उठने का मन नहीं करता। आंखें भारी लगती हैं, शरीर सुस्त और कंबल से बाहर निकलने का मन नहीं करता। क्या ये सिर्फ आलस है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है? आइए जानते हैं कि सर्दियों में हमें इतनी ज्यादा नींद क्यों आती है और इसका हमारे शरीर के बायोलॉजिकल सिस्टम से क्या गहरा रिश्ता है।
हमारा शरीर एक सर्केडियन रिद्म पर काम करता है यानी सोने-जागने का 24 घंटे का नैचुरल पैटर्न। सर्दियों में सूरज देर से निकलता है और जल्दी ढल जाता है, जिससे हमें कम सनलाइन एक्सपोजर मिलता है। जब रोशनी कम होती है, तो शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन (sleep hormone) ज्यादा बनने लगता है। यह हार्मोन हमें नींद का अहसास कराता है और इसीलिए सर्दियों में ज्यादा नींद आती है। Journal of Clinical Endocrinology के अनुसार, सर्दियों में लोगों में मेलाटोनिन सीक्रेशन 30–50% तक बढ़ जाता है।
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ठंड के मौसम में शरीर अपनी एनर्जी बचाने की कोशिश करता है। जब बाहर का तापमान कम होता है, तो शरीर internal heat conserve करने लगता है। इस अवस्था में metabolic activity थोड़ी धीमी हो जाती है, जिससे एनर्जी बर्न कम होती है और शरीर को आराम यानी नींद की जरूरत महसूस होती है। यह वैसा ही है जैसा जानवर सर्दियों में कम एक्टिव, ज्यादा रेस्ट यानि हाइबरनेशन करते हैं!
ठंड के दिनों में हम अक्सर भारी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाना खाते हैं जैसे आलू, परांठे, मिठाई या गरम सूप। कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में serotonin नामक "feel-good" हार्मोन बढ़ाते हैं, जो फिर melatonin में बदलता है। नतीजा पेट भरने के बाद सुस्ती और नींद बढ़ जाती है। दिन में हल्के और प्रोटीन-रिच भोजन लें ताकि ब्लड शुगर संतुलित रहे और नींद ज्यादा न बढ़े।
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सर्दियों में कम धूप मिलने के कारण Vitamin D का लेवल घट जाता है। यह विटामिन बॉडी में energy regulation और mood balance के लिए जरूरी है। कम विटामिन D से थकान, नींद और कम ऊर्जा जैसी समस्याएं आम हैं। Harvard Health की रिपोर्ट के अनुसार, 60% लोग सर्दियों में Vitamin D की कमी से जुड़ी फटीग महसूस करते हैं।
सर्दियों में रातें लंबी होती हैं और शरीर नॉर्मली जल्दी नींद मोड में चला जाता है। हालांकि हम देर से सोते हैं (फोन या टीवी के कारण), लेकिन शरीर अंदर से जल्दी सोने और ज्यादा आराम की मांग करता है। इसलिए सुबह उठना मुश्किल लगता है क्योंकि बॉडी क्लॉक और लाइफस्टाइल में मिसमैच हो जाता है।
ठंड के कारण हमारे शरीर की ब्लड वैसल्स संकुचित (constrict) हो जाती हैं। इससे ब्लड फ्लो थोड़ा धीमा पड़ता है और दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई भी हल्की घटती है। परिणाम दिमाग रिलैक्स मोड में चला जाता है और आपको बार-बार नींद या झपकी आने लगती है।
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