
वैज्ञानिक कैंसर से लड़ने के लिए एक बिल्कुल नया तरीका अपना रहे हैं। इसमें बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके ट्यूमर को अंदर से ही खत्म किया जाएगा। यह तरीका उन माइक्रोब्स (सूक्ष्मजीवों) पर काम करता है जो बिना ऑक्सीजन वाली जगहों पर पनपते हैं। कई ठोस ट्यूमर का अंदरूनी हिस्सा ऐसी ही जगह होती है, जो इन बैक्टीरिया के लिए एक अच्छा माहौल बनाती है।
इस रिसर्च में मुख्य रूप से क्लोस्ट्रीडियम स्पोरोजेन्स (Clostridium sporogenes) नाम के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मिट्टी में पाया जाने वाला एक ऐसा बैक्टीरिया है जो सिर्फ ऑक्सीजन-फ्री माहौल में ही जिंदा रह सकता है। ट्यूमर के अंदर, इसका कोर (केंद्र) मरी हुई कोशिकाओं से बना होता है और वहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इससे बैक्टीरिया को बढ़ने और फैलने का मौका मिलता है, जहां वे पोषक तत्व खाते हैं और धीरे-धीरे ट्यूमर को तोड़ने लगते हैं।
यह रिसर्च एसीएस सिंथेटिक बायोलॉजी (ACS Synthetic Biology) जर्नल में प्रकाशित हुई है।
हालांकि, इसमें एक चुनौती है। जैसे ही बैक्टीरिया ट्यूमर के बाहरी हिस्सों की ओर बढ़ते हैं, वे ऑक्सीजन के संपर्क में आने लगते हैं और मरने लगते हैं। इससे कैंसर को पूरी तरह खत्म करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है। इस मुश्किल से निपटने के लिए, वैज्ञानिकों ने एक दूसरे बैक्टीरिया से एक जीन निकालकर इसमें जोड़ दिया, जो ऑक्सीजन को बेहतर तरीके से झेल सकता है। इस बदलाव से मॉडिफाइड बैक्टीरिया ट्यूमर के बाहरी किनारों के पास भी ज्यादा देर तक जिंदा रह पाते हैं।
अब सवाल था कि बैक्टीरिया को ऑक्सीजन झेलने की ताकत कब दी जाए। इसे कंट्रोल करने के लिए रिसर्चर्स ने बैक्टीरिया के एक नेचुरल कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिसे 'कोरम सेंसिंग' (quorum sensing) कहते हैं। जैसे-जैसे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ती है, वे केमिकल सिग्नल छोड़ते हैं। जब ट्यूमर के अंदर बैक्टीरिया की संख्या एक निश्चित स्तर पर पहुंच जाती है, तभी यह सिग्नल इतना मजबूत होता है कि ऑक्सीजन-टॉलरेंस वाले जीन को एक्टिवेट कर देता है। इससे यह पक्का होता है कि बैक्टीरिया सिर्फ वहीं काम करें जहां उनकी जरूरत है, और शरीर के स्वस्थ टिशू को कोई नुकसान न पहुंचे।
पहले के एक्सपेरिमेंट्स में, बैक्टीरिया को ऑक्सीजन की मौजूदगी में जिंदा रहने के लिए सफलतापूर्वक री-प्रोग्राम किया गया था। कोरम-सेंसिंग सिस्टम की टाइमिंग को एक फ्लोरोसेंट मार्कर (चमकने वाले मार्कर) का उपयोग करके सटीक रूप से सेट किया गया था। रिसर्चर्स इस पूरी प्रक्रिया को एक 'डीएनए सर्किट' (DNA circuit) बनाने जैसा बताते हैं, ठीक किसी इलेक्ट्रिकल सिस्टम की तरह, जहां हर हिस्से का एक खास काम होता है ताकि सिस्टम भरोसेमंद तरीके से काम करे। रिसर्च का अगला फेज ऑक्सीजन-टॉलरेंस जीन और कोरम-सेंसिंग सिस्टम को एक ही बैक्टीरिया में जोड़ना और फिर इसका प्री-क्लिनिकल ट्रायल में टेस्ट करना है।
Health Tips in Hindi (हेल्थ टिप्स): Read latest fitness tips (फिटनेस टिप्स), health care tips for men and women in Hindi. Get exercise tips, diet plans to keep your body fit and healthy at Asianet New Hindi.