
16 मार्च को नेशनल वैक्सीनेशन डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों के बीच जरूरी वैक्सीन को लेकर अवेयरनेस फैलाना है। अगर आपका बच्चा 10 साल का हो गया है, तो इसका ये बिल्कुल मतलब नहीं है कि अब उसे वैक्सीन नहीं लगवानी है। आपको 10 साल की उम्र के बच्चों को बूस्टर वैक्सीन के साथ ही कुछ अन्य वैक्सीन भी लगवानी चाहिए। पहले दी गई टीकों से बनी इम्युनिटी बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि समय समय पर बूस्टर वैक्सीन जरूर लगे। जानिए 10 साल के बच्चे को कौन-सी वैक्सीन लगवानी चाहिए।
टेटनस और डिप्थीरिया के लिए 10 साल की उम्र में Td वैक्सीन का बूस्टर डोज दिया जाता है। इसे लगाने से बच्चे को टेटनस और डिप्थीरिया से सेफ्ती मिलती है। आप डॉक्टर को वैक्सिनेशन कार्ड दिखाकर ये वैक्सीन लगवा सकते हैं।
अगर पहले टायफॉयड का टीका लग चुका है तो 3–5 साल बाद बूस्टर लगाया जाता है। टायफॉयड बूस्टर लगवाने से बच्चे को भविष्य में इस फीवर के खतरे से सुरक्षा मिलती है।
ज्यादातक पेरेंट्स बच्चों को फ्लू इन्फ्लुएंजा वैक्सीन नहीं लगवाते हैं। आप 10 साल नहीं बल्कि हर साल बच्चे को फ्लू वैक्सीन का बूस्टर डोज लगवा सकते हैं।
अगर बच्चे को समय पर MMR या वैरीसेला वैक्सीन नहीं लगी है, तो आप ये वैक्सीन लगवा सकती हैं। इस वैक्सीन से बच्चे को मीजल्स, रुबेला, चिकनपॉक्स, मंप से सुरक्षा मिलती है।
बच्चे के जन्म के बाद जो भी टीके लगाए जाते हैं, उनकी पूरी जानकारी वैक्सीनेशन या इम्यूनाइजेशन कार्ड में होती है। यह कार्ड आमतौर पर हर माता-पिता के पास होता है। जब भी बच्चे को अगला टीका लगवाने के लिए डॉक्टर के पास जाएं, तो यह कार्ड जरूर दिखाएं। इस कार्ड को देखकर बाल रोग विशेषज्ञ आसानी से समझ पाते हैं कि बच्चे को अब तक कौन-कौन से टीके लग चुके हैं और कौन-से टीके अभी लगना बाकी हैं।
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