
सोशल मीडिया पर महिलाओं की इंटिमेट हेल्थ को लेकर कई तरह के ट्रेंड वायरल होते रहते हैं। इन्हीं में से एक है वेजाइनल स्टीमिंग भी शामिल है, जिसे कुछ जगहों पर ‘V-steaming’ भी कहा जाता है। इस प्रोसेस में गर्म पानी या हर्ब्स से निकलने वाली भाप के ऊपर बैठने की सलाह दी जाती है। साथ ही दावा भी किया जाता है कि इससे वजाइना और गर्भाशय की सफाई होती है। साथ ही हार्मोन बैलेंस होता है या शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं। लेकिन इसका सच अक्सर लोगों को नहीं पता होगा।
सेक्सुअल हेल्थ एजुकेटर डॉ. तनाया नरेंद्र ने भी अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में वेजाइनल स्टीमिंग को लेकर एक पोस्ट किया है। उन्होंने इस तरह के वेलनेस दावों पर सवाल उठाते हुए बताया कि महिलाओं के शरीर को ‘क्लीन’ या ‘फिक्स’ करने के नाम पर ऐसे ट्रेंड्स फॉलो करना बिल्कुल भी सही नहीं है। जानिएं एक्सपर्ट ने क्या कहा।
सेक्सुअल हेल्थ एजुकेटर डॉ. तनाया नरेंद्र बताती हैं कि ऐसा बिल्कु भी नहीं है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक वेजाइनल स्टीमिंग से गर्भाशय को डिटॉक्स या साफ करने का कोई प्रूफ नहीं है। भाप मुख्य रूप से बाहरी हिस्से तक ही पहुंचती है और क्लीनिंग जैसा कुछ भी नहीं होता है। आगे वो कहती हैं कि क्लीनिंग से ज्यादा वजाइनल स्टीमिंग के साइड इफेक्ट्स होते हैं।
वजाइना और उसके आसपास की त्वचा संवेदनशील होती है। बहुत गर्म भाप के संपर्क में आने से जलने या त्वचा में जलन का खतरा रहता है। इसके अलावा हर्ब्स, खुशबूदार प्रोडक्ट्स या अन्य पदार्थों के इस्तेमाल से वजाइना का प्राकृतिक pH और बैक्टीरियल बैलेंस प्रभावित हो सकता है, जिससे जलन या यीस्ट इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टर कहती हैं कि वजाइना अपने प्राकृतिक बैक्टीरियल बैलेंस को बनाए रखने में सक्षम होती है। इसलिए इसे अंदर से साफ करने के लिए स्टीमिंग, डाउचिंग या सुगंधित प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार बिना जरूरत ऐसी चीजें इस्तेमाल करने के बजाय सामान्य स्वच्छता बनाए रखना बेहतर है।
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