कहीं चूड़ी तोड़ना तो कहीं समुद्र को नारियल चढ़ाना, जानें रक्षाबंधन से जुड़ी 10 रोचक परंपराएं

Published : Aug 09, 2025, 09:39 AM ISTUpdated : Aug 09, 2025, 09:45 AM IST
Raksha Bandhan interesting traditions

सार

Raksha Bandhan: रक्षाबंधन का पर्व पूरे देश में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। जानिए भाई-बहन के इस पावन रिश्ते से जुड़ी दिलचस्प रस्में और उनका महत्व।

Raksha Bandhan interesting traditions: देशभर में आज रक्षा बंधन का पर्व मनाया जा रहा है। रक्षाबंधन के दिन देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न परंपराएं अपनाई जाती हैं, जो देश की अनूठी संस्कृति के बारे में बताती हैं। भाई के माथे में तिलक लगाकर राखी बांधने तक ही रक्षाबंधन सीमित नहीं है। जानिए देश के विभिन्न हिस्सों में कैसे रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाता है और इनका क्या महत्व है।

राखी बांधने और तिलक लगाने की रस्म

राखी के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी यानी रेशम का पवित्र धागा बांधती हैं और माथे पर तिलक लगाकर उनकी सलामती की कामना करती हैं। भाई बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इस पावन पर्व में ये दृश्य देखने वाला होता है जब बहन-भाई की आंखों में एक-दूसरे के लिए रक्षा और विश्वास की झलक दिखाई देती है। 

बहनों को राखी में उपहार देना

रक्षाबंधन के पावन पर्व में भाई रांखी बंधवाने के बाद बहनों को गिफ्ट देते हैं। उपहार देने से बहन-भाईयों क बीच रिश्ता मजबूत होता है। उपहार की कीमत नहीं बल्कि रक्षाबंधन भाई और बहनों के बीच अटूट प्यार और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

बहन की खूशियों के लिए चूड़ी तोड़ने की परंपरा

कुछ क्षेत्रों में रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों को रंग-बिरंगी चूड़ियाँ बांधती हैं। माना जाता है कि भाई एक चूड़ी तोड़ता है, जिससे बहन के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। भले ही ये सुनने में अजीब लगे लेकिन इस प्रभा में भी बहन और भाई का प्यार छिपा है।

जल ढोने की रस्म

 कुछ समुदायों में बहनें अपने सिर पर जल का घड़ा रखकर अपने भाइयों की परिक्रमा करती हैं। परिक्रमा करने का उद्देश्य सुरक्षा का प्रतीक है।

मंदिर दर्शन और प्रार्थनाएं करने की परंपरा

रक्षाबंधन के दिन परिवार या विशिष्ट समुदाय मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं और एक-दूसरे के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। ऐसा देश के कुछ ही हिस्सों में होता है। 

नारियल चढ़ाने की परंपरा

कोली (महाराष्ट्र) समुदाय में रक्षाबंधन का दिन नारली पूर्णिमा के साथ मनाया जाता है, जहां मछुआरों की सुरक्षा के लिए समुद्र देवता वरुण को नारियल चढ़ाए जाते हैं। मछुआरों की जीविका समुद्र से जुड़ी होती है इसलिए इस दिन समुद्र की पूजा का खास महत्व होता है।

मवेशियों को राखी बांधने की परंपरा

ओडिशा में रक्षाबंधन का दिन गम्हा पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। इस दिन किसान सुरक्षा और समृद्धि के लिए मवेशियों को राखी बांधते हैं।

रक्षाबंधन के दिन राधा-कृष्ण की पूजा 

पश्चिम बंगाल में रक्षाबंधन का दिन झूलन पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण और राधा की प्रार्थना की जाती है और राखी अमरता की आशा का प्रतीक माना जाता है।

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व्रत रखना और चावल छिड़कना

रक्षाबंधन के दिन बहनें व्रत भी रखती हैं। कुछ परिवारों में, बहनें राखी बांधने से पहले अपने भाइयों की भलाई के लिए व्रत रखती हैं। वहीं जम्मू में सलूनो उत्सव मानाया जाता है जिसमें भाइयों के बालों में चावल छिड़कती हैं और सामान्य राखी के बजाय रक्षा सूत्र बांधती हैं।

रक्षाबंधन में पतंगबाजी

उत्तर भारत के कई हिस्सों में, रक्षाबंधन के दौरान पतंगबाजी की जाती है, जो स्वतंत्रता और उत्सव का प्रतीक है। ये रीति-रिवाज भारतीय राज्यों और समुदायों में रक्षाबंधन समारोहों की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।

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