ऊटी से 20 मिनट दूर ये हिडेन जेम, खूबसूरती देख नहीं भरेगा दिल

ऊटी से मात्र 20 मिनट की दूरी पर स्थित टोडा गांव एक छिपा हुआ खजाना है। यहां आप प्राकृतिक सुंदरता के साथ टोडा जनजाति की संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव कर सकते हैं। यहां जानें टोडा गांव पहुंचने का तरीका, घूमने की जगहें और यहां के खास आकर्षण।

ट्रेवल डेस्क। ट्रिप पर जाना किसे पसंद नहीं होता है। कई लोग हैवी क्राउड के कारण यात्रा कैंसिल कर देते हैं तो कई बजट की वजह से। लोगों की बकेट लिस्ट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और साउथ स्टेट के नाम होते हैं। इन्हीं में से हैं तमिलनाडु स्थित ऊटी।  ये भारत के टॉप डेस्टिनेशन में शामिल हैं। जहां पर आप प्राकृतिक नजारों के साथ अध्यात्मिक चीजों को पास से निहार सकते हैं। हालांकि बीते कुछ सालों में ऊटी भी ओवर क्राउडेड हो गया है ऐसे में परेशान होने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। दरअसल, आज आपको ऊटी के पास स्थित ऐसे हिडेन जेम के बारे में बताने जा रहे हैं जो मात्र 20 मिनट की दूरी पर स्थित है। यहां पर न तो आपको टूरिस्ट मिलेंगे और न ही भीड़भाड़। दरअसल, इस प्लेस के बारे में जानकारी खुद फेमस ब्लॉगर अपूर्वा रॉव ने दी है।

 

दरअसल, ये जगह कोई और बल्कि टोडा गांव हैं। जहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं है। यहां पर आप नेचुरल ब्यूटी के साथ कई वॉटरफॉल का मजा ले सकते हैं। हालांकि यहां पर अकेले नहीं पहुंचा जा सकता है। इस गांव में टोंडा नामक जनजाति रहती है। अगर आप यहां आना चाहते हैं तो साथ में जनजाति का एक व्यक्ति का साथ होना जरूर है।

जगलों के बीच स्थित टोडा गांव

यहां पर आप केवल जीप से पहुंच सकते हैं। ये जगलों के बीच में स्थित है। वहीं,इस गांव की दूरी ऊंटी के फेमस वॉटरफॉल पिकारा से लगभघ तीन घंटे है। यहां पर जानवरों को पालने का तरीका, यहां की जीवनशैली अक्सर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। 

टोडा गांव में घूमने की जगह

आप शांत दृश्यों के साथ हरियाली देखने के लिए आप यहां जा सकते हैं। टोडा गांव के नजारें ऊटी से बिल्कुल अलग होते हैं। टोडा गांव आने पर आप ट्राइब म्यूजियम का दीदार करना न भूलें। जहां अदिवासियों के जीवन और उनकी मान्यताओं से जुड़ी चीजों को पास से जान सकते हैं। यहां पर टोडा जनजाति की विरासत और संस्कृति को शानदार तरीक से संरक्षित किया गया है।

खास घरों में रहते टोडा गांव के लोग

टोडा गांव को खास वहां के घर बनाते हैं। यहां के लोग कच्चे-पक्के मकान नहीं बल्कि बांस और पत्थरों से बनें घर में रहते हैं। जहां छोटा से दरवाजा होता है,जिसके आगे लोहे के तार लगे रहते हैं। ये तार जानवरों के लिए लगाए जाते हैं। वहीं, वह घर की ऊपरी छत सजाने के लिए शॉल का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही वह अपने हाथ से बने हुए कपड़े पहनते हैं। टोडा गांव में रहने वाले लोगों खेती,पशुपालन और डेयरी फार्मिंग कर जीवन यापन करते हैं।

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