एक टीचर ऐसा भी: बच्चों का करियर बनाने के लिए खर्च कर दी अपनी जमा पूंजी...हर कोई कर रहा सैल्यूट

Published : Jul 10, 2022, 02:13 PM IST
एक टीचर ऐसा भी: बच्चों का करियर बनाने के लिए खर्च कर दी अपनी जमा पूंजी...हर कोई कर रहा सैल्यूट

सार

इस स्कूल में कक्षा 1 से 5 वीं तक बच्चियां पढ़ाई करती हैं। प्रधान अध्यापक के स्कूल के प्रति उत्कृष्ट कार्य के लिए धार जिले में सम्मान मिल चुका है। बच्चों को लाने और ले जाने की भी सुविधाएं उपलब्ध हैं। 

धार. मध्यप्रदेश के धार जिले के गुलाटी गांव का कन्या सरकारी स्कूल इन दिनों सुर्खियों में है। ये स्कूल अपनी सुविधाओं को लेकर लोगों के बीच चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। यहां पढ़ाई करने वाले बच्चों को जो सुविधाएं मिल रही हैं वो शायद ही प्राइवेट स्कूलों में भी मिलती हो। इस स्कूल के हेड मास्टर शंकरलाल काग ने अपने सैलरी से उन्होंने ये सारी सुविधाएं तैयार करवाई हैं। इस स्कूल में आधारभूत सुविधाओं के लिए हेडमास्टर ने 7 लाख रुपए अपने वेतन से खर्च किए हैं। 

हेड मास्टर ने बताया कि हमारे स्कूल से एक बच्चा चोरी होने की अफवाह फैल गई थी जिसके बाद से गांव के लोगों ने बच्चों को पढ़ाई करने के लिए स्कूल भेजना छोड़ दिया था। लेकिन मैंने बच्चों को फिर से स्कूल वापस लाने का मन बनाया और उसके लिए सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया।

 

खुद खरीदा टैक्टर
बच्चे बिना किसी डर के स्कूल आ सके इसके लिए उन्होंने अपनी सैलरी से खुद एक टैक्टर खरीदा और उसे मोडिफाइ करवाया और अब वो खुद बच्चों को लेने जाते हैं और बच्चों को स्कूल से उनके घर तक छोड़ते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल में एलईडी टीवी भी लगवाई है। वो बच्चों को डिजिटल रूप से भी एजुकेशन दे रहे हैं। जिसके बाद से बच्चों में पढ़ाई को लेकर हौसला बढ़ा है। अब इस स्कूल में बच्चे पढ़ाई करने के लिए उत्साह के साथ आते हैं। 

2014 में हेडमास्टर बनकर आए
हेडमास्टर के रूप में 2014 में हेड मास्टर बनकर शंकरलाल काग इस स्कूल में आए थे। तब से वो अभी तक सात लाख रुपए से अधिक पैसे खुद के खर्च कर चुके हैं। उन्होंने स्कूल में एलईडी टीवी, प्रोजेक्टर, म्यूजिक सिस्टम, आरओ वाटर सहित अन्य कई सुविधाएं उपलब्ध कराई है। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल में टाइल्स भी लगवाए हैं। इस स्कूल में करीब 102 छात्राएं पढ़ाई करती हैं। वो कहते हैं कि अगर सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के लिए पैसे खर्च कर रही है तो वो भी इतना सहयोग तो कर ही सकते हैं।

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