
नई दिल्ली. मानसून सत्र की तैयारियों के सिलसिले में आज कांग्रेस पार्लियामेंट्री कमेटी की बैठक हुई है। इसकी अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी को अभयदान मिल गया. उनके हटाए जाने की अटकलों को विराम लग गया. पार्टी की संसदीय कमेटी ने तय किया कि महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, किसान आंदोलन का मुद्दा सदन में उठाएगी. मानसून सत्र 19 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा।
बंगाल में कांग्रेस की फजीहत बनी कारण
अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से सांसद हैं। वह विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का चेहरा थे और राज्य कांग्रेस के प्रमुख हैं। चौधरी को हटाने की अटकलों को कांग्रेस द्वारा तृणमूल कांग्रेस के साथ बेहतर संबंध बनाना और संसद में भाजपा और मोदी सरकार को घेरने के लिए एक साथ आने के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने अधीर रंजन चौधरी को हटाने की कार्रवाई नहीं कर सारी अटकलों को विराम लगा दिया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में वाम दलों के साथ गठबंधन कर तृणमूल के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, वहीं, केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्य रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला करने से परहेज किया था। ममता की जीत पर उन्हें बधाई भी दी थी। अधीर रंजन चौधरी, ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी हैं।
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अधीर पर लगते रहे हैं ये आरोप
लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता के रूप में अपने दो साल के लंबे कार्यकाल में अधीर रंजन चौधरी पर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विपक्षी दलों के साथ कोई बैठक नहीं करने का आरोप है। टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार “चौधरी सदन में अन्य नेताओं को भेजकर कांग्रेस के स्डैंड के बारे में जानकारी देते हैं। हमने कभी एक साथ बैठक नहीं की। एक अन्य विपक्षी नेता ने कहा 16वीं लोकसभा में जब मल्लिकार्जुन खड़गे सदन में नेता प्रतिपक्ष और ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्य सचेतक थे तब विपक्ष का समन्वय बहुत बेहतर था।
2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में, अभिषेक सिंघवी (बंगाल से सांसद) और प्रदीप भट्टाचार्य (पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी या पीसीसी प्रमुख) जैसे राज्य के नेताओं सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने कांग्रेस और तृणमूल के बीच गठबंधन का समर्थन किया था, लेकिन अधीर रंजन चौधरी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी माने जाते हैं और उन्होंने ऐसी किसी भी योजना का विरोध किया था।
कई मौकों पर, तृणमूल कांग्रेस ने वर्तमान लोकसभा में कांग्रेस और इसके विपरीत बुलाई गई बैठकों को छोड़ दिया। दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को कांग्रेस संसदीय दल कार्यालय में राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई विपक्षी बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था। कांग्रेस के विरोध कार्यक्रम में कभी तृणमूल नजर नहीं आती तो इसी तरह, तृणमूल के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शनों में कांग्रेस की बहुत कम भागीदारी देखी गई है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पांच बार की पूर्व सांसद, जब भी संसद आती थीं तो राजनीतिक लाइनों से हटकर नेता उनसे शिष्टाचार भेंट करते थे। हालांकि, चौधरी कभी नहीं आए और न ही ममता बनर्जी से मिले।
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