विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस किसानों के साथ, लेकिन पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में MSP पर अलग-अलग स्वर

Published : Dec 07, 2020, 06:21 PM ISTUpdated : Feb 05, 2022, 03:22 PM IST
विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस किसानों के साथ, लेकिन पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में MSP पर अलग-अलग स्वर

सार

कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए एमएसपी एक बड़ा मुद्दा है। वे लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकार लिखित में दे कि एमएसपी खत्म नहीं की जाएगी। कांग्रेस पार्टी भी किसानों के समर्थन में है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जहां पर कांग्रेस की सरकार है वहां पर राज्य द्वारा एमएसपी की गारंटी दी गई है। जवाब है नहीं।  

नई दिल्ली. कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए एमएसपी एक बड़ा मुद्दा है। वे लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकार लिखित में दे कि एमएसपी खत्म नहीं की जाएगी। कांग्रेस पार्टी भी किसानों के समर्थन में है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जहां पर कांग्रेस की सरकार है वहां पर राज्य द्वारा एमएसपी की गारंटी दी गई है। जवाब है नहीं।  

एमएसपी पर तीनों राज्यों के अलग-अलग स्वर
कांग्रेस ने हाल ही में लागू किए गए कृषि कानूनों पर केंद्र का विरोध करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की कानूनी गारंटी देने के लिए जोर दिया, लेकिन पार्टी द्वारा शासित राज्य पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के स्वर एक जैसे नहीं दिखे। इन तीन राज्यों ने अपने किसानों को केंद्रीय कानूनों के दायरे से बाहर रखने की मांग करते हुए फार्म बिल पारित किए हैं, लेकिन कानूनी रूप से एमएसपी को लेकर तीनों राज्यो में एकरूपता नहीं दिखी। 

पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में एमएसपी 

1- पंजाब का बिल केवल गेहूं और धान के लिए एमएसपी गारंटी के बारे में है। अन्य फसलों को लेकर नहीं है। कृषि के जानकार इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि बिल में सिर्फ दो फसलों का जिक्र क्यों है, जबकि पंजाब में कपास, मक्का, दाल और दूध का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है और राज्य सरकार इसकी एमएसपी तय करती है। 
2- राजस्थान के बिल केवल कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग के मामले में एमएसपी गारंटी देते हैं। मंडी में एमएसपी का प्रावधान नहीं किया गया है। सरकार की ओर से पारित किए गए इस नए बिल का किसान महापंचायत ने विरोध किया था। 
3- छत्तीसगढ़ का बिल MSP को कानूनी गारंटी देने के मुद्दे पर अस्पष्ट है। यहां नए कानून में सरकार ने निजी मंडियों, गोदामों और खाद्य प्रसंस्करण कारखानों को डीम्ड मंडी घोषित करने का प्रावधान कर दिया है। इस नई व्यवस्था से निजी मंडियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा। सरकार की कोशिश है कि जहां कहीं भी कृषि उपजों की खरीद बिक्री हो, वहां मंडी कानून लागू हो ताकि किसानों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

"तीनों राज्यों में से किसी ने भी एमएसपी का मुद्दा नहीं उठाया"
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) के राष्ट्रीय संयोजक वी एम सिंह ने कहा, इन राज्यों में से किसी ने भी उचित रूप से एमएसपी का मुद्दा नहीं उठाया है। यदि आप पंजाब के बिल को देखते हैं, तो यह केवल गेहूं और धान के बारे में बात करता है।राजस्थान के बिल का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि यह केवल कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग के मामले में एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए है। आप यह कहते हुए प्रावधान क्यों नहीं कर सकते कि राज्य में एमएसपी से नीचे कुछ भी नहीं बेचा जा सकता है?

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