
नई दिल्ली. निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात मरकज के संचालक मौलाना साद की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस बीच खबर है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के बेटे से पूछताछ की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौलाना साद के बेटे से उन लोगों की जानकारी मांगी गई है जो मरकज का कामकाज देखते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में तब्लीगी जमात से संबंध रखने वाले करीब 30% मरीज हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में 17 राज्यों में 1023 कोरोना वायरस से पॉजिटिव मरीज तब्लीगी जमात से संबंध रखते हैं।
साद के बेटे से 2 घंटे हुए पूछताछ
मौलाना साद के बेटे सईद से करीब 2 घंटे पूछताछ हुई। क्राइम ब्रांच की टीम ने सईद से करीब 20 लोगों की डिटेल्स मांगे। बता दें कि मौलाना साद के तीन बेटे हैं। सईद मरकज से जुड़े कामों में सबसे ज्यादा सक्रिय बताया जाता है।
मौलाना साद कोरोना निगेटिव
क्राइम ब्रांच ने कहा था कि मौलाना साद टेस्ट करवाए। फिर साद की तरफ से एक प्राइवेट हॉस्पिटल की रिपोर्ट भेजी गई, जिसमें साद कोरोना निगेटिव था। हालांकि क्राइम ब्रांच ने कहा कि किसी सरकारी हॉस्पिटल से जांच करवाई जाए। लेकिन साद की तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आया।
कौन है मौलाना साद?
तब्लीगी जमात का संचालक मौलाना साद कांधला के मूल निवासी हैं। इसके पूर्वज आजादी से पहले कांधला छोड़कर दिल्ली में बस गए थे। मौलाना साद का शामली के कांधला के गांव मलकपुर-जिडाना की छोटी नहर के पास 24 बीघे का फार्म हाउस है। यह संपत्ति उसी के नाम है। फार्म हाउस के लगभग तीन सौ गज के हिस्से को आवासीय रूप दिया गया है। इसमें आधा दर्जन से ज्यादा कमरे, लॉबी व बरामदें हैं।
1 से 15 मार्च तक तब्लीगी जमात में हुआ था जलसा
निजामुद्दीन में 1 से 15 मार्च तक तब्लीगी जमात मरकज का जलसा था। यह इस्लामी शिक्षा का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां हुए जलसे में देश के 11 राज्यों सहित इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से भी लोग आए हुए थे। यहां पर आने वालों की संख्या करीब 5 हजार थी।
जलसा खत्म होने के बाद 2 हजार लोग मरकज में ही थे
जलसा खत्म होने के बाद कुछ लोग तो लौट गए, लेकिन लॉकडाउन की वजह से करीब 2 हजार लोग तब्लीगी जमात मरकज में ही फंसे रह गए। लॉकडाउन के बाद यह इकट्ठा एक साथ रह रहे थे। तब्लीगी मरकज का कहना है कि इस दौरान उन्होंने कई बार प्रशासन को बताया कि उनके यहां करीब 2 हजार लोग रुके हुए हैं। कई लोगों को खांसी और जुखाम की भी शिकायत सामने आई। इसी दौरान दिल्ली में एक बुजुर्ज की मौत हो गई। जांच हुई तो पता चला कि वह कोरोना संक्रमित था और वहीं निजामुद्दीन में रह रहा था। तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ।
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