
नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति मामले (Delhi excise policy case) में हुए मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी ने कोर्ट में तीन हजार पेज की चार्जशीट फाइल कर दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम नहीं है।
ईडी ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में कारोबारी समीर महेंद्रू को 27 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इस केस में ईडी द्वारा की गई यह पहली गिरफ्तारी थी। ईडी के लिए गिरफ्तारी के 60 दिन के भीतर कोर्ट में चार्जशीट फाइल करना आवश्यक था। ईडी ने बताया है कि वह अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट जल्द दाखिल करेगी।
सीबीआई की चार्जशीट में नहीं मनीष सिसोदिया का नाम
गौरतलब है कि सीबीआई द्वारा शुक्रवार को दिल्ली लिकर पॉलिसी केस (Delhi liquor policy case) में कोर्ट में चार्जशीट फाइल किया गया था। सीबीआई द्वारा फाइल किए गए चार्जशीट में मनीष सिसोदिया का नाम शामिल नहीं था। सीबीआई ने कहा था कि सिसोदिया के खिलाफ अभी जांच चल रही है।
सीबीआई द्वारा फाइल किए गए चार्जशीट में सात लोगों के नाम हैं। इसमें आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर और हैदराबाद के कारोबारी अभिषेक बोइनपल्ली शामिल हैं। इसके साथ ही चार्जशीट में शराब कारोबारी समीर महेंद्रू, बोइनपल्ली के सहयोगी अरुण पिल्लई, मुत्थु गौतम और दो सरकारी अधिकारियों के नाम हैं। इन अधिकारियों ने पहले एक्साइज डिपार्टमेंट में काम किया है।
मनीष सिसोदिया ने कहा- नहीं हुआ घोटाला
चार्जशीट में नाम नहीं होने पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि कोई शराब घोटाला नहीं हुआ। उन्होंने ट्वीट किया, "ये मेरे लिए बेहद गर्व की बात है कि इनकी तमाम साजिशों और झूठी FIRs के बाद भी ये मेरे ऊपर कोई आरोप नहीं लगा पा रहे। 800 अफसरों की टीम ने 500 जगह रेड कर जो चार्जशीट बनाई है उसमें मेरा नाम नहीं है। CBI और ED की चार्जशीट ने साबित कर दिया कि कोई शराब घोटाला नहीं हुआ।"
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क्या है मामला?
दिल्ली सरकार बीते साल नई आबकारी नीति लाई थी। दिल्ली आबकारी नीति के लागू होने के बाद आप सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। आरोप है कि इस नीति से डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने करीबियों को लाभ पहुंचाया है। इसके एवज में उनके खास लोगों के माध्यम से करोड़ों रुपए का ट्रांसफर किया गया है। दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस मामले में सीबीआई ने मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामला उलझते देख अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति वापस लेकर पुरानी नीति बहाल कर दी थी। विवादास्पद आबकारी नीति 17 नवम्बर 2021 को लागू की गई थी।
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