AAP की गारंटी- सत्ता में आए तो 30 दिन में जारी होगा OPS, क्या है ये, कब बंद हुआ, क्यों शुरू करना चाहती है 'आप'

| Nov 26 2022, 07:47 PM IST

AAP की गारंटी- सत्ता में आए तो 30 दिन में जारी होगा OPS, क्या है ये, कब बंद हुआ, क्यों शुरू करना चाहती है 'आप'

सार

Gujarat Assembly Election 2022: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को गुजरात चुनाव के बीच सरकारी कर्मचारियों को गारंटी दी कि अगर आप सत्ता में आई तो एक महीने में ओपीएस का नोटिफिकेशन जारी होगा। 

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव के बीच पहले चरण के प्रचार के लिए तीन दिन और बचे हैं। पहले चरण की वोटिंग 1 दिसंबर को होगी। वहीं, हर राजनीतिक दल ने प्रचार में अपनी ताकत झोंक रखी है। आम आदमी पार्टी के कई नेता पिछले कुछ दिनों से लगातार यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी सत्ता में आई तो पुरानी पेंशन स्कीम यानी ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू कर दिया जाएगा। 

बता दें कि पहले चरण की वोटिंग प्रक्रिया के लिए गजट नोटिफिकेशन 5 नवंबर को और दूसरे चरण की वोटिंग प्रक्रिया के लिए 10 नवंबर को जारी हुआ था। स्क्रूटनी पहले चरण के लिए 15 नवंबर को हुई, जबकि दूसरे चरण के लिए 18 नवंबर की तारीख तय थी। नाम वापसी की अंतिम तारीख पहले चरण के लिए 17 नवंबर और दूसरे चरण के लिए 21 नवंबर को हुई। गुजरात विधानसभा चुनाव में दोनों चरणों के लिए नामांकन का दौर समाप्त हो चुका है। राज्य में पहले चरण की वोटिंग 1 दिसंबर को होगी, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को होगी। पहले चरण के लिए प्रचार अभियान 29 नवंबर की शाम पांच बजे खत्म होगा। वहीं, मतगणना दोनों चरणों की 8 दिसंबर को होगी। पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया 14 नवंबर अंतिम तारीख थी। दूसरे चरण के लिए नामाकंन प्रक्रिया की अंतिम तारीख 17 नवंबर थी। 

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सरकार बनने के एक महीने के अंदर नोटिफिकेश जारी करने का वादा 
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने शनिवार, 26 नवंबर को राज्य में सरकारी कर्मचारियों से वादा किया कि ओपीएस यानी ओल्ड पेंशन स्कीम की नोटिफिकेशन 31 जनवरी को जारी कर दी जाएगी। केजरीवाल ने कहा कि वे राज्य के सभी कर्मचारियों को गारंटी देते हैं कि गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के एक महीने के भीतर ओल्ड पेंशन स्कीम लागू हो जाएगी। उन्होंने यह भी कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब में आम आदमी पार्टी  की सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को लागू करके दिखाया है। 

प्वाइंटर्स में समझिए OPS क्यों राजनीतिक दलों का प्रिय मुद्दा- 

  • ओपीएस से कर्मचारियों को सीधे फायदा होना है और यह एक बड़ा मतदाता वर्ग है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल खासकर विपक्ष इसे मुद्दा बनाए हुए हैं। कर्मचारियों को अपने पक्ष में करने के लिए इसे फिर लागू करने का वादे किया जा रहा है। 
  • कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और कुछ अन्य लोकल पार्टियां भी इसमें सबसे आगे दिख रही है। पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस को अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में 1 अप्रैल 2004 से बंद कर दिया गया था। इसे नेशनल पेंशन स्कीम यानी एनपीएस मे तब्दील कर दिया गया था। 
  • तमाम कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना लागू कराने के लिए आंदोलन चला रहे हैं। इसमें नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम यानी एनएमओपीएस भी शामिल है। राज्यों में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से भी समय-समय पर ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने की मांग की जा रही है। 
  • कांग्रेस ने भी राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ओपीएस को मुद्दा बनाया और सरकार बनने के बाद इसे लागू भी किया। कांग्रेस अब यह दांव दूसरे राज्यों में चलना चाहती है। पार्टी मान रही है कि ओपीएस गुजरात चुनाव में उसे जीत दिला सकता है। 

क्या  है ओपीएस का गणित- 

  • ओल्ड पेंशन स्कीम में कर्मचारी की अंतिम सैलरी का 50 प्रतिशत पेंशन रकम होती थी। इस रकम का भुगतान सरकार करती थी। दूसरी ओर एनपीएस के तहत वे कर्मचारी जिन्होंने 1 अप्रैल 2004 के बाद नियुक्ति पाई है, वे अपनी सैलरी से 10 प्रतिशत रकम पेंशन के लिए देते हैं। 
  • वहीं, सरकार इसमें 14 प्रतिशत का योगदान देती है। पेंशन का पूरा 24 प्रतिशत हिस्सा पेंशन रेगुलरेटर यानी पीएफआरडीए के पास जमा किया जाता है। वो इसे सही जगह निवेश करता है, जिससे रकम बढ़ती है। 
  • लगभग सभी राज्यों में ओपीएस पर कर्मचारी संगठन आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों के अलग-अलग संगठन हैं, मगर ओल्ड पेंशन स्कीम मामले में सभी एक बैनर तले आ रहे हैं और यही खासकर भाजपा की चिंता का सबब बना हुआ है।
  • दरअसल, कर्मचारी संगठनों का मानना है कि ओपीएस की जगह एनपीएस में बहुत कम फायदे मिलते हैं। इसमें कर्मचारी और उनके परिवार भविष्य सुरक्षित नहीं है। यही नहीं रिटायरमेंट के बाद जो पैसा मिलता भी है, उस पर टैक्स लगता है। 
  • एनपीएस में सरकारी कर्मचारियों को इन्वेस्टमेंट की मंजूरी दी जाती है। वे पूरे कार्यकाल में पेंशन अकाउंट में रेगुलर योगदान कर पैसे को इन्वेस्टमेंट का अप्रुवल दे सकते हैं। रिटायर होने पर पूरी पेंशन रकम का एक हिस्सा एक बार में निकाल सकते हैं। 
  • कर्मचारी बची हुई रकम के लिए एन्युटी प्लान खरीद सकते हैं। इसे मासिक, तिमाही या वार्षिक स्तर पर निकाल भी सकते हैं। रिटायर हो चुके संबंधित कर्मचारी को उसके निधन तक यह रम रकम मिलती रहती है। इसके बाद पूरी रकम एकमुश्त वो जिसे नॉमिनी बनाया होता है, उसे मिल जाती है। 

बीते 18 नवंबर को पंजाब में जारी हुआ नोटिफिकेशन 
बता दें कि पंजाब में मान सरकार ने बीते 18 नवंबर को पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। पार्टी ने इस साल की शुरुआत में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणा पत्र में ऐलान किया था कि अगर वे सत्ता में आए तो पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करेंगे। हालांकि, सरकार बनने के छह महीने बाद भी जब सरकार ने इस पर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया तो इसका विरोध भी हो रहा था। यह विरोध पार्टी को हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव और गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान भी देखने को मिला। जिसके बाद पार्टी को 18 नवंबर को इसका नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा। 

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