18 साल से कम उम्र बच्चों में ब्लैक फंगस को रोकने DGHS ने जारी की गाइड लाइन

Published : Jun 10, 2021, 12:27 PM ISTUpdated : Jun 10, 2021, 12:41 PM IST
18 साल से कम उम्र बच्चों में ब्लैक फंगस को रोकने DGHS ने जारी की गाइड लाइन

सार

कोरोना संक्रमित 18 साल से कम उम्र के बच्चों में ब्लैक फंगस की आशंका की आशंका के मद्दनेजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस (DGHS) ने एक नई गाइडलाइन जारी की है। DGHS ने कहा है कि म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस एक गंभीर बीमारी है, इसलिए लक्षण उभरने का इंतजार न करें।

नई दिल्ली. 18 साल से कम उम्र के बच्चों में ब्लैक फंगस का देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस (DGHS) ने एक नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा गया है कि कोरोना संक्रमितों के इलाज में स्टेरॉयड का इस्तेमाल नुकसानदायक साबित हो रहा है। DGHS ने कहा है कि बच्चों के मामूली लक्षण वाले केस (asymptomatic) में स्टेरॉयड का इस्तेमाल जिंदगी के लिए ठीक नहीं है। एक्सपर्ट भी यह कह चुके हैं कि स्टेरॉयड का अधिक या गलत इस्तेमाल ब्लैक फंगस को फैलने में मददगार साबित होता है।

गाइडलाइन में कहा गया

  • इलाज के दौरान किडनी फंक्शन और इलोक्ट्रोलाइट्स की मॉनटरिंग की जानी चाहिए। इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पाए जाने वाले सोडियम, पोटेशियम जैसे मिनरल होते हैं। खून में इनकी और कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा नापने इलेक्ट्रोलाइट पैनल यानी ब्लड टेस्ट किया जाता है।
  • गाइड लाइन में एम्फोटेरेसिन बी के इस्तेमाल को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
  • पोसाकोनाजोल (Posaconazole) टैबलेट का इस्तेमाल तभी करें, जब एम्फोटेरेसिन बी नहीं दे पा रहे हों। इसमें 11 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी दवा की खुराक के बारे में दिशा-निर्देश हैं।
     

क्या है ब्लैक फंगस
ब्लैक फंगस बीमारी एक प्रकार का फंगल इंफेक्शन है जो नाक और आंख को प्रभावित कर रहा है। यह कोरोना से रिकवर हुए मरीजों में अधिक पाया जा रहा है। डॉक्टर्स के अनुसार यह उन लोगों में अधिक हो रहा है, जिनकी इम्यूनिटी बेहद कम है। ऐसे लोग भी ब्लैक फंगस का शिकार बन रहे हैं जो डायबिटिक हैं, किडनी, लीवर और दिल संबंधी दिक्कतें हैं।

इन मामलों में अधिक होता है ब्लैक फंगस का खतरा
एचआईवी या एड्स, कैंसर, डायबिटीज, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, व्हाइट ब्लड सेल का कम होना, लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल, ड्रग्स का इस्तेमाल, पोषण की कमी, प्रीमैच्योर बर्थ आदि। या फिर जिनका इन जैसी गंभीर बीमारियों में आईसीयू में लंबे समय से इलाज चल रहा हो। पिछले दिनों एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया था कि कोविड के साथ अनियंत्रित डायबिटीज ब्लैक फंगस को बढ़ने में मदद करती है।

जानिए फंगस के लक्षण

  • बुखार और ठंड लगना: बुखार और ठंड लगना कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण हैं, जो हल्के मामलों में 4-5 दिनों तक रह सकते हैं। यदि आपका बुखार संक्रमण के बाद वापस आता है तो यह फंगल संक्रमण के कारण हो सकता है।
  • सांस लेने में कठिनाई: जब फंगस फेफड़ों में फैलता है, तो सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सांस फूलना या सांस फूलना यह संकेत दे सकता है कि फंगस फेफड़ों में फैल गया है।
  • खून के साथ खांसी: यदि संक्रमण फेफड़ों में फैल जाता है, तो संक्रमित व्यक्ति को लगातार खांसी का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में खांसी के साथ खून भी आ सकता है। ऐसा लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं।
  • आंख के लक्षण: संक्रमण नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। यह मुख्य रूप से साइनस, फेफड़ों को प्रभावित करता है और फिर मस्तिष्क की ओर बढ़ता है। इससे सिरदर्द और आंखों में जलन या दर्द हो सकता है।
  • त्वचा को नुकसान: यह फंगल संक्रमण त्वचा पर भी फैल सकता है जिससे जलन, लालिमा, सूजन, छाले और खुजली हो सकती है। इस तरह के लक्षण महसूस होने पर आपको तुरंत जांच करानी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें-कोरोना संक्रमित बच्चों के लिए DGHS ने जारी की नई गाइडलाइन, जानिए सीटी स्कैन और रेमडेसिविर को लेकर क्या कहा

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