क्या होता है WHO का एक्जीक्यूटिव बोर्ड, जिसके अध्यक्ष बने डॉ. हर्षवर्धन, भारत के लिए क्या है महत्व?

Published : May 23, 2020, 12:21 PM ISTUpdated : Feb 02, 2022, 10:29 AM IST
क्या होता है  WHO का एक्जीक्यूटिव बोर्ड, जिसके अध्यक्ष बने डॉ. हर्षवर्धन, भारत के लिए क्या है महत्व?

सार

पूरी दुनिया कोरोना से जंग लड़ रही है। भारत ने इस जंग में अब तक अहम भूमिका निभाई है। लेकिन अब भारत वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) यानी WHO में अहम भूमिका निभाएगा। भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने शुक्रवार को  WHO के चेयरमैन  का पद संभाला। हर्षवर्धन ने जापान के डॉ हिरोकी नाकातानी की जगह ली। 

नई दिल्ली. पूरी दुनिया कोरोना से जंग लड़ रही है। भारत ने इस जंग में अब तक अहम भूमिका निभाई है। लेकिन अब भारत वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) यानी WHO में अहम भूमिका निभाएगा। भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने शुक्रवार को  WHO के चेयरमैन  का पद संभाला। हर्षवर्धन ने जापान के डॉ हिरोकी नाकातानी की जगह ली। 

WHO क्या है? 
WHO संयुक्त राष्ट्र की संस्था है, जो इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ की जिम्मेदारी निभाता है। मौजूदा वक्त में WHO कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अहम भूमिका निभा रहा है। WHO की स्थापना 1948 में हुई थी। इसके 194 सदस्य देश हैं।  

क्या होता है  WHO का एक्जीक्यूटिव बोर्ड?
भारत साउथ ईस्ट एशिया रीजन का सदस्य है। भारत 12 जनवरी 1948 को इसका सदस्य बना था। पिछले साल ही भारत एक्जीक्यूटिव बोर्ड का सदस्य बना। भारत तीन साल तक एक्जीक्यूटिव बोर्ड का सदस्य बना रहेगा। एक्जीक्यूटिव बोर्ड में वर्ल्ड हेल्थ असेंबली 194 सदस्य देशों में से 34 देश चुनती है। ये सभी देश अपने अपने देश से एक व्यक्ति को चुनते हैं, जो हेल्थ के क्षेत्र में जानकारी रखते हैं। इस तरह से 34 सदस्य देश 34 प्रतिनिधि चुनते हैं। इन प्रतिनिधिओं में से एक को अध्यक्ष यानी चेयरमैन चुना जाता है। यह पद 1 साल के लिए होता है। 
 
क्या काम करता है एक्जीक्यूटिव बोर्ड? 
डॉ हर्षवर्धन जिस एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष बने हैं, वह काफी अहम है। दरअसल, WHO वर्ल्ड हेल्थ असेंबली (WHA) और एग्जिक्युटिव बोर्ड से संचालित होता है। यानी WHA जो नीतियां बनाती हैं, उन्हें प्रभाव में लाने के लिए ये बोर्ड काम करता है। इसके अलावा स्वास्थ्य नीतियों में यह बोर्ड WHA को सलाह भी देता है। यह बोर्ड और WHA मिलकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करते रहे, जहां दुनिया के स्वास्थ्य के मुद्दों पर चर्चा होती है और समस्याओं का समाधान खोजा जाता है।


 
दो बार होती है मीटिंग? 
एक्जीक्यूटिव बोर्ड की साल में दो बार मीटिंग होती है। पहली जनवरी और दूसरी मई में। मई की मीटिंग WHA की मीटिंग के बाद होती है। 
 
भारत के लिए इस पद का क्या महत्व है? 
दुनिया में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा है। ऐसे में चीन को लेकर WHO की भूमिका पर सवाल उठ रहा है। ऐसे में डॉ हर्षवर्धन को यह पद मिलना काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, स्वास्थ्य के क्षेत्र में WHO संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ एजेंसी है। इस संस्था पर पूरे विश्व की स्वास्थ्य की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी है।

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