
Nirmala Sitharaman on ED misuse: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि ईडी के कामकाज में सरकार का किसी तरह से हस्तक्षेप नहीं होता है। विपक्ष केवल अपनी गलतियों को छुपाने के लिए तरह-तरह के आरोप लगाता रहता है। दरअसल, विपक्ष लगातार यह आरोप लगाते हुए सरकार की आलोचना करता रहता है कि भारतीय जनता पार्टी के विरोधियों के खिलाफ अक्सर केंद्रीय एजेंसी का दुरुपयोग किया जाता है। वित्त मंत्री ने गुरुवार को इसे सिरे से खारिज कर दिया।
मनी लॉन्डिंग का मामला आने पर ही ईडी करती है हस्तक्षेप
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पुणे में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद प्रेस कांफ्रेंस कर रही थीं। उन्होंने कहा कि ईडी तभी सामने आती है जब मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह होता है। सीतारमण ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसी भले ही वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आती है लेकिन वह अपनी जिम्मेदारियों को जानती है। सरकार उसके काम में हस्तक्षेप नहीं करती है।
उन्होंने कहा कि ईडी के कामकाज को समझने की कोशिश करें। यह घटना होने पर मौके पर नहीं पहुंचता है। इसकी भूमिका तब सामने आती है जब यह सामने आता है कि किसी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का उल्लंघन किया गया है। मनी लॉन्ड्रिंग का केस नहीं होने पर ईडी कहीं इन्वाल्व नहीं होती। उन्होंने कहा कि ईडी कभी भी सीधे तौर पर तस्वीर में नहीं आता है। यह तब आता है जब संदेह होता है कि मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
विपक्षी दल लगातार ईडी के दुरुपयोग का लगा रहे आरोप
दरअसल, विपक्षी दलों का लगातार यह आरोप बीजेपी सरकार पर लगाया जा रहा है कि वह बीजेपी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को दबाने के लिए ईडी सहित अन्य जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के सहयोगितयों, एनसीपी के नेताओं व पूर्व मंत्रियों, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के मंत्रियों, दिल्ली, बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर सहित कई प्रदेशों में विपक्षी दलों के नेताओं पर लगातार हो रही सीबीआई व ईडी की कार्रवाई पर विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेर रहा है।
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