
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले काफी समय से खराब चल रहे हैं। औपचारिक रूप से दोनों देशों के बीच बातचीत नहीं हो रही है। इस बीच कुछ मौके ऐसे आए हैं जब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल एक दूसरे देशों में गए और बात की है। इसी क्रम में पाकिस्तान से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली आने वाला है।
भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच पानी को लेकर चल रहे विवाद पर बातचीत होगी। दिल्ली में 30-31 मई को इस संबंध में बैठक होगी। पाकिस्तानी कमिश्नर फोर इंडस वाटर्स सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह ने कहा है कि बाढ़ पूर्वानुमान डेटा साझा करने पर बातचीत होगी। इसके साथ ही पीसीआईडब्ल्यू (पाकिस्तान सिंधु जल आयुक्त) की वार्षिक रिपोर्ट पर भी चर्चा की जाएगी।
हर साल दोनों देशों के बीच होती है बैठक
मेहर अली ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल निर्माणाधीन पाकल दुल और लोअर कलनई बांधों का दौरा नहीं करेगा, लेकिन उनपर और अन्य परियोजनाओं पर चर्चा होगी। बता दें कि मार्च में भारत और पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को उसकी वास्तविक भावना से लागू करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी और आशा व्यक्त की थी कि स्थायी सिंधु आयोग की अगली बैठक भारत में जल्द से जल्द आयोजित की जाएगी। सिंधु जल संधि के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार हर साल पाकिस्तान और भारत में बैठक होती है।
वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत आएगा प्रतिनिधिमंडल
पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत आएगा। पिछले कुछ सप्ताह में भारत का दौरा करने वाला यह दूसरा पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल है। इस महीने की शुरुआत में एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी ढांचे (आरएटीएस) की बैठक के लिए दिल्ली का दौरा किया था।
सिंधु जल संधि 1960 के तहत बांटा गया है पानी
1960 की सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच पानी का बंटवारा हुआ है। तीन पूर्वी नदियों- सतलुज, ब्यास और रावी का पानी अप्रतिबंधित उपयोग के लिए भारत को आवंटित किया जाता है, जबकि तीन पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब- पाकिस्तान में जाती हैं।
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इसके अतिरिक्त, नई दिल्ली को डिजाइन के विशिष्ट मानदंडों के अधीन, तीन पश्चिमी नदियों पर नदी परियोजनाओं के माध्यम से जलविद्युत उत्पन्न करने का अधिकार है। संधि के तहत पाकिस्तान पश्चिमी नदियों पर भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन पर आपत्ति उठा सकता है।
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