
G20 Summit 2023: नई दिल्ली में चल रहे जी20 शिखर सम्मेलन भारत की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में भी जाना जाएगा। दरअसल, भारत ने पूर्व और पश्चिम को एक ही मंच पर लाने का एक लगभग असंभव कार्य पूरा कर लिया है। आलम यह कि दोनों पक्षों ने पूर्ण सहमति भी अपनी तरफ से जताया है। एक तरफ, रूस और चीन - जिन्होंने 2022 बाली घोषणाओं से खुद को अलग कर लिया था - अब 2023 नई दिल्ली घोषणाओं में यूक्रेन के संदर्भ पर सहमत हो रहे हैं जबकि पश्चिम ने स्वीकार किया है कि पिछले साल बाली में निंदा कठोर थी। दरअसल, एशियानेट न्यूज ने पूर्व और पश्चिम को मनाने की पुष्टि समिट शुरू होने के पहले ही कर दी थी।
राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार से शुरू हुए जी20 शिखर सम्मेलन की तैयारी से जुड़े एक अधिकारी ने एशियानेट को बताया, "हम नई दिल्ली घोषणाओं पर आम सहमति बना चुके हैं। पिछले साल बाली घोषणा के दौरान इस पर कोई सहमति नहीं थी क्योंकि मॉस्को और बीजिंग ने यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर खुद को अलग कर लिया था। दरअसल, रूस और चीन जी20 को एक आर्थिक मंच बनाने पर जोर दे रहे थे और मांग कर रहे थे कि मॉस्को-कीव संघर्ष का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) पर छोड़ दिया जाए। हालांकि, भारत के शेरपा अमिताभ कांत ने बताया कि देर तक दोनों पक्ष इस पर सहमत हो गए कि युद्ध से संबंधित कठोर शब्दों का कोई उल्लेख नहीं किया जाएगा। भारत बार-बार दोहराता रहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है बल्कि संवाद और कूटनीति का युग है।
इंडिया-मिडिल ईस्ट आर्थिक गलियारा से चीन को संदेश
भारत-मध्य-पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा को स्थापित करने के लिए एमओयू साइन हो गया है। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के बन जाने से दक्षिण पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व यूरोप के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और इकोनॉमिक इंट्रीग्रेशन के माध्यम से इकोनॉमिक डेवलपमेंट को गति प्रदान करेगा। इस कनेक्टिविटी के लिए दो अलग-अलग आर्थिक गलियारा बनाए जाएंगे। माना जा रहा है कि जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान इस प्रोजेक्ट के साइन होने पर चीन को बड़ा संदेश दिया गया है। दरअसल, यह परियोजना, चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के विकल्प के तौर पर अस्तित्व में लाया जा रहा। पढ़िए क्या है आर्थिक गलियारा का फायदा…
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