गुलाम नबी आजाद पर कांग्रेस का पलटवार: पहले मोदी के सामने आंसू, पद्मविभूषण और फिर...यह संयोग नहीं सहयोग है

Published : Aug 26, 2022, 05:47 PM ISTUpdated : Aug 26, 2022, 05:52 PM IST
गुलाम नबी आजाद पर कांग्रेस का पलटवार: पहले मोदी के सामने आंसू, पद्मविभूषण और फिर...यह संयोग नहीं सहयोग है

सार

Ghulam Nabi Azad:जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच लंबे समय से कांग्रेस से नाराज चल रहे सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से इस्तीफा दे ही दिया। आजाद ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से लेकर सभी पदों से इस्तीफा दिया है। उन्होंने कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को 5 पन्नों का इस्तीफा भेजा है। 

नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) में एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। पार्टी में लगातार अंतर्कलह सामने आ रही है और बड़े नेताओं के पद व संगठन छोड़ने का सिलसिला जारी है। भारत जोड़ो यात्रा के पहले जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस से आजाद हुए गुलाम नबी के पार्टी छोड़ने के बाद उन पर सत्ता एवं पद का लोभी होने का आरोप लग रहा है। दशकों से उनके सहयोगी रह चुके तमाम साथी गुलाम नबी आजाद पर आरोप लगा रहे हैं कि जबतक कांग्रेस के अच्छे दिन थे, सत्ता थी तो सबकुछ ठीक था, लेकिन जब संघर्ष करने के दिन आए तो नेतृत्व पर आरोप लगाकर भाग गए। पूरे देश से कांग्रेस के दिग्गज लगातार गुलाम नबी आजाद के खिलाफ बयान दे रहे हैं। हालांकि, बीजेपी ने गुलाम नबी आजाद के निर्णय को सराहा है। आईए जानते हैं कि इस्तीफा के बाद गुलाम नबी आजाद प्रकरण पर किसने क्या कहा...

कांग्रेस ने सम्मान और पहचान दी...

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद जी के फ़ैसले और वक्तव्य को पढ़कर मुझे अफ़सोस है। कांग्रेस ने उनको सम्मान और पहचान दी। 42 साल से वह बिना पद के नहीं रहे - उनके शब्द अनुचित हैं, मेरी समझ से परे हैं।

पहले मोदी के सामने आंसू, पद्मविभूषण और फिर...

कांग्रेस के सीनियर लीडर व मुख्य प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि जिस व्यक्ति को कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज़्यादा सम्मान दिया, उसी व्यक्ति ने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत आक्रमण करके अपने असली चरित्र को दर्शाया है। पहले संसद में मोदी के आंसू, फिर पद्म विभूषण, फिर मकान का एक्सटेंशन…। यह संयोग नहीं सहयोग है ! कोई भी आसानी से क्रोनोलॉजी समझ सकता है।

 

धोखे से बाजी मारने की सोचने वाले गलत हैं...

कांग्रेस की जम्मू-कश्मी प्रभारी रजनी पटेल ने कहा कि जो सोचते हैं की धोखे से बाजी मार गए, हकीकत में तो कितनों का भरोसा हार गए। उन्होंने कहा कि सोच से शायद गुलाम ही रहे होंगे तभी आज खुद को आजाद समझ रहे हैं। बरसों सत्ता को भोगा और संघर्ष के समय मौकापरस्ती में अपनों को छोड़ा यह सोच गुलामी और धोखे की भावना को ही दर्शाती है॥

संघर्ष करने का मौका आया तो भागे

कांग्रेस सांसद व प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि 1980 से 2021 - गांधी की चार पीढ़ियों (24 साल केंद्रीय मंत्री- जम्मू-कश्मीर सीएम - 35 साल जीएस) के साथ रहकर सत्ता का निरंतर आनंद लेते रहे। अब जब सत्ता नहीं है तो फिर भी वही लोगों और व्यवस्था को अंत में एक शातिर तरीके से दोषी ठहरा रहे है। व्यक्ति के चरित्र और पार्टी के प्रति कृतज्ञता की भावना के बारे में बहुत कुछ बताता है।

 

कांग्रेस के सामने चुनौतियों के लिए ऐसे ही लोग दोषी

कांग्रेस के सीनियर लीडर पवन खेड़ा ने कहा कि जब वे सारे फैसले ले रहे थे तो गर्व से कोर ग्रुप से ताल्लुक रखते थे। अब जब दूसरे निर्णय ले रहे हैं, तो वह उन्हें चाटुकार के रूप में लेबल करता है। आज कांग्रेस के सामने जो चुनौतियां हैं, वे उन्हीं जैसे नेताओं की वजह से हैं।

पांच पन्नों का इस्तीफा नहीं नई नौकरी के लिए सीवी...

कांग्रेस की सदफ जफर ने कहा कि गुलाम नबी आजाद का यह पांच पन्नों का इस्तीफ़ा नहीं सीवी ज़्यादा लग रहा है। पार्टी परिवार होती है, जिसमें अच्छा समय भी आता है और मुश्किल समय से भी गुजरना पड़ता है। जब अच्छे समय में सुख उठाए तो किसी का किसी से शिकवा नहीं किया, संघर्ष करने का वक्त आया तो इल्ज़ाम लगाकर भाग खड़े होना किस तरह से सही है। राज्य सभा की कुर्सी मिलती तो खुश हो जाते, कश्मीर में चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी जवाबदेही वाला काम था, सो चले गए। उन्होंने कहा कि हमने तो मुश्किल समय में पार्टी का दामन थामा, पार्टी ने हर संघर्ष में साथ दिया, प्रलोभन मिलना वास्तविक था, मगर संस्कारों में एक अहम चीज़ मिली है - वफादारी और निष्ठा।

जब लड़ाई का समय तो चले गए

अजय माकन ने कहा कि हमने (गुलाम नबी) आजाद साहब का (इस्तीफे का) पत्र देखा। दु:ख की बात है कि उन्होंने ऐसे समय में कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया, जब कांग्रेस देश भर में बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी, ध्रुवीकरण की लड़ाई लड़ने जा रही है। दु:ख की बात है कि वे इस लड़ाई में हिस्सा नहीं बन रहे। 

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