
Gulzarilal Nanda Birthday: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारीलाल नंदा का आज (सोमवार) 124वां जन्मदिन है। 4 जुलाई, 1898 को सियालकोट (पाकिस्तान) में पैदा हुए नंदा दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे। उनका प्रथम कार्यकाल पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद 27 मई 1964 से 9 जून 1964 तक रहा। वहीं, दूसरी बार वो 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी 1966 तक लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे। गुलजारी लाल नंदा के बारे में कहा जाता है कि वो जमीन से जुड़े शख्स थे। उनके बारे में कहा जाता है कि एक बार तो उन्होंने कीचड़ से भरे तालाब में स्नान किया था।
आखिर क्यों कीचड़ से भरे तालाब में नहाए थे नंदा :
दरअसल, गुलजारी लाल नंदा 1967 में कैथल लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे। तब हरियाणा में स्थित कुरुक्षेत्र भी कैथल सीट में ही आता था। इस दौरान वे सोमवती अमावस्या के मौके पर कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। यहां जब वो ब्रह्मसरोवर में नहाने पहुंचे तो उस तालाब में पानी कम और कीचड़ ज्यादा था। ऐसे में उन्होंने उस कीचड़ में ही स्नान किया। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मसरोवर को ठीक करने के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड बनाया, जिसके तहत ब्रह्मसरोवर का विकास किया गया।
अब 150 एकड़ में है ब्रह्मसरोवर :
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के तहत विकसित हुआ ब्रह्मसरोवर अब 150 एकड़ में फैला हुआ है। इसकी परिक्रमा डेढ़ किलोमीटर लंबी है। वहीं, अब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के तहत 164 तीर्थस्थल आते हैं। बता दें कि गुलजारीलाल नंदा ने 1922 से 1972 तक लेबर मूवमेंट (श्रम आंदोलन) चलाया। इसके तहत उन्होंने अहमदाबाद की कपड़ा मिलों में मजदूर यूनियन की स्थापना की।
जब इंदिरा गांधी को दिया दो टूक जवाब :
जून, 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया था। इसके कुछ दिनों बाद ही यानी 4 जुलाई को गुलजारीलाल नंदा का बर्थडे था। कुरुक्षेत्र के कुछ साथी उन्हें बधाई देने दिल्ली आए हुए थे। नंदाजी सभी से बात कर रहे थे कि तभी पीएम हाउस से एक संदेश आया कि इंदिरा गांधी बधाई देने आना चाहती हैं। इस पर नंदाजी ने साफ कह दिया था कि मैंने शुभकामनाएं ले ली हैं, उन्हें आने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, बाद में इंदिरा गांधी नंदा जी को मनाने के लिए उनके घर पहुंचीं। तब गुलजारीलाल नंदा ने इंदिरा से साफ कहा था- आपके पिता ने इस देश में लोकतंत्र को सींचकर बड़ा किया और आपने इमरजेंसी लगा दी।
असहयोग आंदोलन में भी शामिल हुए नंदा :
गुलजारीलाल नंदा ने 1921 के असहयोग आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। 1932 में उन्हें सत्याग्रह की वजह से जेल भी जाना पड़ा था। मार्च, 1950 में वे योजना आयोग में उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हुए। इसके बाद इसी साल सितंबर में वे केंद्र सरकार में योजना मंत्री बने। 1991 में उन्हें पद्मविभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 15 जनवरी 1998 को 100 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
ये भी देखें :
इमरजेंसी 1975 ने देश को दिए कई दिग्गज नेता, 12 ऐसे जो आगे चलकर बड़े मुकाम पर पहुंचे
46 साल पहले इस तरह की गई थी लोकतंत्र की हत्या, 21 महीनों तक खौफ में जीने को मजबूर थी जनता
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.