
नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश देने से मना किया है। सीजेआई ने सभी याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है। सभी याचिकाओं पर केंद्र सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा गया है। इसके अलावा अब 144 याचिकाओं के अलावा कोई और याचिका मंजूर नहीं की जाएगी। असम मामले पर अलग से सुनवाई नहीं होगी। बता दें कि सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 144 याचिकाएं लगाई गई है, जिसपर सीजेआई एसए बोबड़े, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि हम कुछ याचिकाएं बड़ी बेंच के पास भेज सकते हैं। इस पर एटॉर्नी जनरल ने कहा कि अभी तक हमें सिर्फ 60 याचिकाएं ही मिली हैं। हम उन्हीं पर जवाब दे सकते हैं। बता दें कि ज्यादातर याचिकाओं में कानून को असंवैधानिक करार देकर रद्द करने की मांग की गई है। कहा गया है कि सीएए संविधान की मूल ढांचे के खिलाफ है। 12 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन बिल (CAA) को कानून के तौर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दी।
एटॉर्नी जनरल (सरकारी वकील) : 144 याचिकाओं के अलावा किसी और याचिका को लिस्ट न करने का आदेश दे दें।
कपिल सिब्बल : कम से कम संविधान पीठ के गठन का आदेश दे दीजिए। हम कानून पर रोक की मांग नहीं कर रहे हैं। आप उसके अमल को 2 महीने के लिए निलंबित कर दें।
सीजेआई : चीफ जस्टिस ने कहा कि हम एकतरफा आदेश नहीं दे सकते हैं।
एटॉर्नी जनरल : कपिल सिब्बल की मांग पर एटॉर्नी जनरल ने कहा कि आप दूसरी तरह से रोक की ही मांग रहे हैं। चीफ जस्टिस ने भी कहा कि ऐसा करना रोक लगाना ही माना जाएगा।
वकील विकास सिंह (असम पक्षकार) : विकास सिंह ने अंतरिम आदेश की मांग की। उन्होंने कहा, इस कानून से 40 लाख लोगों को नागरिकता मिल जाएगी। इससे असम के कई इलाकों की डेमोग्राफी ही बदल जाएगी।
वकील (याचिकाकर्ता) : अब लोगों की नागरिकता सरकारी बाबुओं के भरोसे छोड़ दी जाएगी।
एटॉर्नी जनरल : एटॉर्नी जनरल ने इसका विरोध किया। कुछ वकीलों ने असम से जुड़े मामलों को अलग से सुनवाई की मांग की।
सीजेआई : सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि आप असम मामले में कब जवाब देंगे। एटॉर्नी जनरल ने कहा कि दो हफ्ते में जवाब देंगे।
कपिल सिब्बल : यूपी में लोगों के नाम के आगे टिक और क्रॉस लगाए जा रहे हैं। इससे लोगों में भय का माहौल है। यह सब 2 महीने के लिए रोक देने में क्या नुकसान है। उन्होंने कहा कि अभी कानून के नियम तय नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकार ने कार्यवाही शुरू कर दी है।
सीएए क्या है?
नागरिकता (संशोधन) कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से भारत आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों नागरिकता दी जाएगी। हालांकि शर्त यह है कि वह 6 साल से भारत में रह रहे हो। यानी जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ गए हैं उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।
सीएए को लेकर विवाद क्यों?
इस कानून को लेकर सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है, जो कि संविधान के खिलाफ है। आरोप है कि संविधान में धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किया जा सकता है, लेकिन इस कानून में ऐसा किया गया है। वहीं पूर्वोत्तर में लोगों का कहना है कि शरणार्थियों को नागरिकता मिलने से उनकी अपनी संस्कृति और पहचान खत्म हो जाएगी। सीएए के खिलाफ 38 दिन से शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन हो रहा है।
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