
नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी लहर से उपजे ऑक्सीजन संकट को दूर करने केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा सुप्रीम कोर्ट भी कोशिश जारी रखे हुए है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से देश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। खासकर ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट किस राज्य को केंद्र की तरफ से कितनी ऑक्सीजन दी जा रही है, सरकार का क्या एक्शन प्लान है, इस सब पर पैनी नजर रखे हुए है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फिर केंद्र को फटकार लगा दी। दिल्ली सरकार का कहना है कि आदेश के बावजूद उसे 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन नहीं मिली है। इस पर SC ने केंद्र के चेताया कि उसे कड़े फैसले के लिए मजबूर न किया जाए। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्र को यह सप्लाई तब तक जारी रखनी होगी, जब तक कि आदेश की समीक्षा नहीं हो जाती या कोई नया बदलाव नहीं हो जाता है। वहीं, कर्नाटक का ऑक्सीजन कोटा भी 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर हर रोज 1200 मीट्रिक टन करने को भी कहा।
अगर हर हाईकोर्ट ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर आदेश देने लगा, तो समस्या हो जाएगी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आदेश दिया कि वो दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करे। दिल्ली सरकार की ओर से वकील राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। कर्नाटक के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है, वो अच्छे से जांचने-परखने के बाद ही दिया है। इसलिए उस पर शंका नजर नहीं आती। लेकिन SC ने कर्नाटक हाईकोर्ट को नसीहत भी देते हुए कहा- हमारे पास सीमित मात्रा में ऑक्सीजन है। यह एक राष्ट्रीय समस्या है। ऐसे में अगर हर हाईकोर्ट ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर निर्देश देने लगा, तो इससे समस्या पैदा हो जाएगी। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इसे खारिज कर दिया गया। SC ने कहा लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हों, तब HC शांत नहीं बैठ सकता है।
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