जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग रोकने के लिए केंद्र सरकार की बड़ी पहल, तैनात हो रहे CRPF के 2000 जवान

Published : Jan 04, 2023, 08:21 PM ISTUpdated : Jan 04, 2023, 08:34 PM IST
जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग रोकने के लिए केंद्र सरकार की बड़ी पहल, तैनात हो रहे CRPF के 2000 जवान

सार

जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पूंछ जिले में टारगेट किलिंग रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सीआरपीएफ के दो हजार से अधिक जवानों को तैनात करने का फैसला किया है। जवानों की तैनाती अल्पसंख्यक इलाकों में हो रही है।

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। सरकार ने राजौरी और पूंछ में सीआरपीएफ के दो हजार से अधिक जवानों को तैनात करने का फैसला किया है। जिले के अल्पसंख्यक आबादी वाले इलाकों में जवानों की तैनाती शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने यह कदम पिछले दिनों राजौरी में बड़े आतंकी हमले के बाद उठाया है। यहां दो आतंकी हमले में अल्पसंख्यक समुदाय के 6 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में दो बच्चे थे। इसके साथ ही 11 लोग घायल हुए थे। 

एक अधिकारी ने बताया कि आतंकी हमले के खतरे को देखते हुए सरकार ने राजौरी और पूंछ में सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए सीआरपीएफ की 20 से अधिक कंपनियों (2,000 से अधिक जवान) को तैनात किया जा रहा है। सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर जनरल और अन्य बड़े अधिकारी जवानों की तैनाती की निगरानी कर रहे हैं। दोनों जिलों में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। 

अल्पसंख्यक लगा रहे हैं सुरक्षा देने की गुहार
बता दें कि राजौरी जिले के डांगरी गांव में रविवार शाम में आतंकियों ने अल्पसंख्यकों के तीन घरों में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में चार लोगों की मौत हो गई थी और छह लोग घायल हो गए थे। सोमवार को घटना के विरोध में अल्पसंख्यक समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे थे तभी आतंकियों द्वारा लगाए गए एक आईईडी में धमाका हो गया था। धमाके की चपेट में आकर दो बच्चों की मौत हो गई थी और पांच लोग घायल हो गए थे। इस घटना के बाद अल्पसंख्यक समाज के लोग केंद्र सरकार से सुरक्षा देने की गुहार लगा रहे हैं।

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बता दें कि आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय में टारगेट किलिंग बढ़ा दिया है। आतंकी कश्मीरी पंडितों, हिंदुओं और प्रवासियों को निशाना बना रहे हैं। आतंकियों ने 2022 में 29 नागरिकों की हत्या की थी। इनमें 21 स्थानीय निवासी और 8 प्रवासी मजदूर थे।

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