
दिल्ली. जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद हुए लॉक डाउन के बाद बुधवार को जम्मू नेताओं की नज़रबंदी हटा दी गई है। आर्टिकल 370 और धारा 35 ए हटाए जाने के बाद से घाटी में कर्फ्यू लगा हुआ था। यह फैसला खंड विकास परिषद चुनाव के लिए मतदान की घोषणा के बाद लिया गया है।
सुरक्षा लॉकडाउन लागू होने के दो महीने बाद जम्मू के सभी नेताओं की नजरबंदी हटी दी गई है। हालांकि, कश्मीर घाटी में उनके समकक्षों को हिरासत या घर में नजरबंद रखा गया है।
खंड विकास परिषद चुनाव के लिए फैसला-
जम्मू के जिन नेताओं को नजरबंद किया गया था, उन्हें रिहा कर दिया गया है। उन पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए गए। यह फैसला सरकार द्वारा राज्य में पंचायत राज व्यवस्था के दूसरे स्तर के खंड विकास परिषद के लिए चुनाव की घोषणा के कुछ दिनों बाद लिया गया है। जम्मू क्षेत्र शांतिपूर्ण है, इसलिए राजनीतिक नेताओं पर से कंट्रोल हटा दिया गया है। रिहा करने का निर्णय जम्मू-कश्मीर के मुख्य नाव अधिकारी द्वारा सोमवार को खंड विकास परिषद चुनाव के लिए मतदान की घोषणा के बाद लिया गया।
रिहा किए गए ये जम्मू नेता-
रिहा किए गए नेताओं में देवेंद्र सिंह राणा, रमन भल्ला, हर्षदेव सिंह, चौधरी लाल सिंह, विकार रसूल, जावेद राणा, सुरजीत सलाथिया और सज्जाद अहमद किचलू शामिल हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता देवेंद्र राणा ने एनडीटीवी को बताया, 'हां, मुझे कल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब आप पर कोई भी प्रतिबंध नहीं है।'
हाउस अरेस्ट पर थे जम्मू क्षेत्र के नेतागण-
बता दें, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सहित लगभग 400 राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। वहीं कुछ नेता हाउस अरेस्ट पर थे। आपको बता दें कि करीब 400 नेताओं को हिरासत में लिया गया था।
घाटी में इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद
अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। कश्मीर घाटी में पिछले 57 दिनों से इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जल्द इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के आदेश दिए हैं।
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