
श्रीनगर. कश्मीर में जुम्मे की नमाज के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर घाटी के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को ताजा प्रतिबंध लगाए गए। अधिकारियों ने बताया कि घाटी में लगातार 54वें दिन जनजीवन प्रभावित रहा। इस दौरान बाजार बंद रहे और सार्वजनिक वाहन सड़कों से नदारद रहे। अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए घाटी के कुछ इलाकों में शुक्रवार सुबह में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगाए गए हैं।
इन इलाको में लगाया गया प्रतिबंध
श्रीनगर के नौहट्टा, रैनावाड़ी, सफाकदल, खान्यार, महाराज गंज और हजरतबल पुलिस थाना क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि गांदरबल, अनंतनाग, अवंतिपोरा, सोपोर और हंदवाड़ा क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाए गए हैं। प्रशासन ने लाल चौक सिटी सेंटर बंद कर दिया है। यह क्षेत्र कारोबारी हब है। यहां पर अवरोधक कांटेदार तारें सभी प्रवेश और बाहर निकलने वाले मार्गो पर लगा दी गई हैं।
किसी भी बड़ी मस्जिद में जुम्मे की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं
अधिकारियों ने बताया कि जुम्मे की नमाज को देखते हुए ऐहतियात के तौर पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को केंद्र सरकार द्वारा समाप्त किए जाने और 2 केंद्र शासित क्षेत्रों में बांटे जाने के बाद से यहां प्रतिबंध लगा हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसी आशंका है कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग प्रदर्शन भड़काने के वास्ते जुम्मे की नमाज के लिए एकत्र होने वाली भीड़ का फायदा उठा सकते हैं। इसके मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन प्रतिबंध लगाए गए हैं। नौहट्टा में जामिया मस्जिद या हजरतबल में दरगाह शरीफ समेत घाटी में किसी भी बड़ी मस्जिद में जुम्मे की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं है।
कई नेता व 3 पूर्व मुख्यमंत्री है हिरासत में या नजरबंद
अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर में मुख्य बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान 54वें दिन भी बंद रहे। सड़कों से सार्वजनिक वाहन नदारद हैं और गुरूवार को निजी कार भी कम संख्या में दिखीं। उन्होंने बताया कि कश्मीर में लैंडलाइन काम कर रहे हैं लेकिन फोन सेवा और इंटरनेट सेवा बंद है। राज्य में कई नेताओं समेत पूर्व 3 मुख्यमंत्रियों-फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती अब भी हिरासत में या नजरबंद हैं।
[यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है]
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