
नई दिल्ली. कृषि बिलों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 33वां दिन है। इस बीच सरकार ने किसानों को 30 दिसंबर को बातचीत के लिए बुलाया है। वहीं, किसानों ने बातचीत के लिए 29 दिसंबर का प्रस्ताव भेजा था और इस प्रस्ताव के साथ किसानों ने अपनी चार शर्ते भी रखी थी। अब ऐसे में मोदी सरकार द्वारा किसानों को बात करने के लिए 29 जगह 30 दिसंबर को बुलाए जाने पर काफी नाराज दिखे हैं और करीब 1500 टेलीकॉम टॉवरों को नुकसान पहुंचाया है। लोगों ने किसानों का किया समर्थन...
पंजाब में कई जगहों पर लोगों ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया। किसानों के समर्थन में लोगों ने करीब 1500 टेलीकॉम टॉवरों को नुकसान पहुंचाया। इसकी वजह से कई जगहों पर मोबाइल सर्विस पर असर पड़ा है। मोगा में पुलिस ऐसे ही एक मामले की जांच कर रही है। उधर, किसान संगठनों ने इन घटनाओं की निंदा की है। सोशल मीडिया पर टेलीकॉम टॉवर को नुकसान पहुंचाते कुछ लोगों को एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जो कि न्यूज एजेंसी द्वारा ट्विटर पर शेयर किया गया है।
सरकार ने 30 दिसंबर को बुलाई किसानों के साथ बैठक
29 दिसंबर को बातचीत करने के लिए किसानों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर भेजा था, जिसके जवाब में सरकार की ओर से विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें उन्होंने किसानों से बातचीत को 30 दिसंबर को विज्ञान भवन में दोपहर 2 बजे रखी गई है। उन्होंने लिखा कि 'इस बैठक में आपके द्वारा प्रेषित विवरण के परिप्रेक्ष्य में तीनों कृषि कानूनों एवं एमएसपी की खरीद व्यवस्था के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 एवं विद्युत संशोधन विधेयक, 2020 में किसानों से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।'
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किसानों ने रखी ये चार मांगे
किसानों ने 29 दिसंबर को सरकार से बातचीत का प्रस्ताव भेजा था। इस बातचीत के लिए किसानों ने अपनी चार शर्ते रखी थीं...
1. तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द या निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि
2. सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक MSP की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान।
3. 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020' में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं।
4. किसानों के हितों की रक्षा के लिए 'विद्युत संशोधन विधेयक 2020' के मसौदे में जरूरी बदलाव।
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