
पुंडुचेरी। तमिलनाडु और पुडुचेरी में इन दिनों एक ही नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है-IPS ईशा सिंह। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ सेकंड के एक वीडियो ने उन्हें रातों-रात पूरे देश की चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में वह TVK की जनरल सेक्रेटरी बुस्सी आनंद से माइक्रोफोन छीनती हुई दिखती हैं और फिर तेज आवाज़ में पूछती हैं-“तुम्हारे खून में इतने लोगों का खून है…40 लोग मर चुके हैं…तुम क्या कर रहे हो?” IPS ईशा सिंह का यह वीडियो इतना पावरफुल था कि लोग उन्हें तुरंत "लेडी सिंघम", “Real Life Singham” और “Fearless IPS Officer” कहने लगे। लेकिन हकीकत यह है कि उनकी कहानी सिर्फ एक वायरल क्लिप से कहीं बड़ी, गहरी और प्रेरणा देने वाली है।
9 दिसंबर की TVK रैली पुडुचेरी के उप्पलम पोर्ट ग्राउंड में हो रही थी। इजाज़त 5000 लोगों की थी, लेकिन भीड़ उससे कहीं ज्यादा थी। यही भीड़ 28 सितंबर को करूर में मां-बाप, बच्चों और परिवारों से 41 लोगों की जान ले चुकी थी, जब TVK की रैली में भगदड़ मच गई थी। इसलिए ईशा सिंह पहले से अलर्ट थीं। उन्होंने अपने सीनियर्स को एक हफ्ता पहले अलर्ट भी किया था कि बड़ी रैली में रिस्क हो सकता है। भीड़ बढ़ने पर उन्होंने मंच पर नेताओं को चेताया। और जब उनकी बात अनसुनी की गई तो वो रुकने वाली नहीं थीं। वायरल वीडियो में उनका गुस्सा सिर्फ भीड़ पर नहीं है-वह उस लापरवाही पर है जिसने दर्जनों जानें ली थीं। इसलिए यह टकराव एक बहादुर अधिकारी का वह सच था, जो ड्यूटी से टकराकर नहीं, ड्यूटी निभाकर सामने आया।
TVK की रैली में बुस्सी आनंद से माइक छीनते हुए IPS ईशा सिंह का वीडियो इंटरनेट पर छा गया। भीड़ के बीच खड़ी एक युवा महिला अधिकारी की आवाज पूरे शोर को काटती हुई सुनाई दी। कई लोग इसे एक साहसिक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे करूर जैसी त्रासदी को रोकने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
28 सितंबर को करूर रैली में 41 लोगों की मौत ने पूरे तमिलनाडु को झकझोर दिया था। इसी वजह से पुडुचेरी में TVK इवेंट को लेकर प्रशासन पहले से चौकन्ना था। ईशा सिंह ने रैली से एक हफ्ते पहले ही अपने सीनियर्स को चेतावनी दी थी कि भीड़ नियंत्रण पर विशेष इंतज़ाम जरूरी हैं। रैली के दौरान उन्होंने बार-बार आयोजकों को संख्या नियंत्रित रखने को कहा, पर भीड़ बढ़ती गई। इसी तनाव के बीच मंच पर वह टकराव हुआ जिसने ईशा को वायरल कर दिया।
ईशा सिंह का जन्म 1998 में मुंबई में हुआ। उन्होंने नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु से डिग्री ली और लंबे समय तक मानवाधिकार मामलों पर काम किया। हाउसिंग सोसाइटी में सीवर टैंक हादसे में तीन सफाईकर्मियों की मौत के बाद उनके परिवारों को मुआवजा दिलाने में न सिर्फ उन्होंने केस लड़ा, बल्कि सिस्टम की खामियों को भी देखा। इसी दौरान उन्हें लगा कि बदलाव सिर्फ कोर्टरूम से नहीं आएगा-इसके लिए सिस्टम के अंदर होना जरूरी है। महामारी के दौरान उन्होंने UPSC की तैयारी की और दूसरी कोशिश में 133वीं रैंक के साथ IPS बन गईं।
ईशा के पिता योगेश प्रताप सिंह IPS थे और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने पर उन्हें कई बार सज़ा वाली पोस्टिंग मिली। आखिरकार उन्होंने सिस्टम के विरोध में इस्तीफा दे दिया। उनकी मां आभा सिंह एक जानी-मानी वकील हैं, जिन्होंने कई पब्लिक इंटरेस्ट मामलों में संघर्ष किया। ईशा कहती हैं कि “मुझे घर से ही सीख मिली कि कानून बिना हिम्मत सिर्फ़ एक फर्नीचर है।” 2021 में उन्होंने तीन सफाई मजदूरों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया। वह कहती हैं कि “कानून लड़ाई जीतने में मदद करता है, लेकिन सिस्टम बदलने के लिए अधिकार चाहिए।” इसी सोच के कारण उन्होंने UPSC की तैयारी की और दूसरी कोशिश में IPS बनने का सपना पूरा किया।
पुडुचेरी में लोग SP ईशा को रात में पेट्रोलिंग करते देखने के आदी हो चुके हैं। वे सड़क पर उतकर महिलाओं, ऑटो चालकों, छात्रों और आम लोगों से बात करती हैं। कई लोग कहते हैं कि उन्हें देखकर लगता है कि पुलिस वर्दी भी इंसानियत के साथ काम कर सकती है।
बिल्कुल नहीं। पुडुचेरी में लोग उन्हें रात के किसी भी समय सड़कों पर पेट्रोलिंग करते हुए देखते हैं। वह • देर रात घर लौट रही महिलाओं से बात करती हैं। युवाओं को ड्रग्स और सेफ्टी पर गाइड करती हैं और ऑटोरिक्शा वालों, विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों से सीधे जुड़ती हैं। मीडिया कहता है कि उनकी लोकप्रियता चिल्लाने वाले वीडियो से नहीं, उनकी शांत, मेहनती और जमीन से जुड़े काम से बनी है।
तमिल फिल्मों में लंबे समय से ‘ईमानदार पुलिस ऑफिसर’ की इमेज दिखाई जाती है। लेकिन पुडुचेरी में जो देखा गया, वह रील नहीं, रियल पुलिस ऑफिसर की हिम्मत थी। ईशा सिंह किसी से भी डरने वाली अधिकारी नहीं। वे मैदान में खड़ी होती हैं, सत्ता से सवाल करती हैं, और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं। देश भर के युवा, महिलाएं और स्टूडेंट उन्हें एक रोल मॉडल की तरह देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं-“असली सिंघम आता है… तो ऐसा दिखता है।” और यही वजह है कि IPS ईशा सिंह सिर्फ एक वीडियो नहीं-एक सोच, एक साहस और ईमानदार सिस्टम की उम्मीद बन गई हैं।
नहीं-उनकी असली पहचान और गहरी है। हाल ही में “लेडी सिंघम” का लेबल उन्हें खूब मिला। लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि ईशा की पहचान इससे पहले से बनी हुई है-एक ऐसे अधिकारी के रूप में जो डरती नहीं, झुकती नहीं, और राजनीतिक दबाव में भी नियमों का पालन कराती हैं। उनकी यही छवि आज उन्हें सुर्खियों में ला रही है।
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