
नेशनल न्यूज। मुस्लिम पर्सलन लॉ के नियम निश्चित तौर पर काफी अलग हैं। इसमें कई बार संशोधन को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ है। फिलहाल एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में आई है जिसमें सवाल उठाया गया है कि क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत 15 साल की लड़की का निकाह किया जा सकता है। तमाम राज्यों की हाईकोर्ट में प्रकरण में अलग-अलग निर्णय दिए गए हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि इसपर स्पष्ट और सर्वमान्य फैसला दिया जाए। अब सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर विचार करेगा।
सीजेआई ने कहा- विचार कर जल्द देंगे निर्णय
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के मुताबिक तमाम हाईकोर्ट के अलग-अलग फैसलों के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य होगा। इस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड ने कहा है कि वास्तव में एक ही प्रकरण पर अलग-अलग निर्णय भले ही वह कितनी भी विषम परिस्थिति में दिया गया हो भ्रम पैदा करने वाला होता है। ऐसे में इस बारे में जल्द ही विचार कर फैसला सुनाया जाएगा।
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क्या है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 1973 में बनाया गया था। यह एक निजी संस्था के जैसी है जो मुसलमानों के हितों की रक्षा और उनके मुद्दों पर आम जनता का मार्गदर्शन करने के लिए काम करता है। इसमें 51 उलेमा की एक कार्य समिति होती है जो तमाम प्रकरण पर विचार कर नियम बनाती है।
देश में शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष
भारती आचार संहिता के तहत 15 साल की लड़की नाबालिग की श्रेणी में आती है। विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु देश में 18 वर्ष निर्धारित की गई है। ऐसे में सामान्य तौर पर 18 साल से कम उम्र में विवाह गैरकानूनी होगा। इसके अंतर्गत सजा का भी प्रावधान है।
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