
Bihar Liquor case: बिहार में जहरीली शराब से हुई मौतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच का आदेश दिया है। एनएचआरसी (NHRC) ने जहरीली शराब से हुई मौतों की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। मानवाधिकार आयोग के सदस्य की अध्यक्षता में गठित इस जांच कमेटी को मौका-मुआयना कर जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
बिहार में कम से कम 70 लोगों की गई जान
बिहार एक शराब प्रतिबंधित प्रदेश है। यहां पूर्णरूप से शराबबंदी लागू है। लेकिन राज्य में पड़ोसी प्रदेशों से शराब की खूब तस्करी हो रही है। आलम यह कि अरबों रुपये की शराब बिहार में खप जा रही है। यह बात दीगर है कि राज्य सरकार शराब तस्करी को लगातार नकारती रही है। लेकिन जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने बिहार में शराबबंदी की पोल खोलकर रख दी। बुधवार को राज्य के सारण छपरा जिले में जहरीली शराब से शुरू हुए मौतों के सिलसिले ने भूचाल ला दिया। जहरीली शराब पीने से अचानक लोग बीमार पड़ने लगे और अस्पतालों में भर्ती होने लगे। बुधवार को करीब दस लोगों की मरने से सूचना ने हड़कंप मचा दिया। लेकिन देखते ही देखते यह संख्या 70 के आसपास तक पहुंच चुकी है। सैकड़ों लोगों के आंखों की रोशनी जा चुकी है।
जो शराब पीयेगा वो तो मरेगा ही
बिहार में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान भी काफी चर्चा में है। सीएम ने इस मामले में गुरुवार को विधानसभा के बाहर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जो शराब पीयेगा, वो मरेगा ही। बिहार में जहरीली शराब से मौत कोई नई बात नहीं है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में लोग जहरीली शराब से मरते हैं। विपक्ष शराब के मुद्दे पर केवल राजनीति कर रहा है। जब बिहार में शराबबंदी नहीं थी, तब भी अन्य राज्यों में लोगों की मौत होती थी। लोगों को खुद सतर्क रहना चाहिए।
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