PMRBP विजेताओं से रूबरू हुए PM मोदी, 'वोकल फॉर लोकल' की अपील-'भविष्य में भारत में बने प्रॉडक्ट्स ही खरीदें'

Published : Jan 24, 2022, 07:36 AM ISTUpdated : Jan 24, 2022, 01:22 PM IST
PMRBP विजेताओं से रूबरू हुए PM मोदी, 'वोकल फॉर लोकल' की अपील-'भविष्य में भारत में बने प्रॉडक्ट्स ही खरीदें'

सार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी(PM modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) विजेताओं के साथ बातचीत की। PMRBP के तहत पुरस्कार विजेता को एक पदक, एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिया जाता है।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी(Prime Minister Narendra Modi) आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) विजेताओं से रूबरू हुए। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी और राज्य मंत्री डॉ. मुंजपारा महेंद्रभाई भी मौजूद थीं। बच्चे अपने परिजनों के साथ अपने जिले के मजिस्ट्रेट के साथ जिला मुख्यालय से जुड़ें। PMRBP के तहत पुरस्कार विजेता को एक पदक, एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिया जाता है। 

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने ब्लॉकचैन प्रौद्योगिकी के उपयोग के जरिये वर्ष 2021 और 2022 के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं को डिजिटल प्रमाणपत्र प्रदान किए। बता दें कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में ब्लॉक के मायने बहुत सारे डेटा ब्लॉक्स से होता है। इसमें अलग-अलग ब्लॉक्स में डेटा स्टोर किया जाता है, जो एक-दूसरे जुड़े होते हैं। इससे डेटा की एक लंबी चेन बनती जाती है। इस नए डेटा को एक नए ब्लॉक में स्टोर कर दिया जाता है। यानी इससे डाटा में बदलाव या छेड़छाड़ या डिलीट नहीं किया जा सकता है। इसलिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी सुरक्षित मानी जाती है।

ये अवार्ड खास है
मोदी ने कहा-नौजवान साथियों, आपको आज ये जो अवार्ड मिला है, ये एक और वजह से बहुत खास है। ये वजह है- इन पुरस्कारों का अवसर! देश इस समय अपनी आज़ादी के 75 साल का पर्व मना रहा है।  आपको ये अवार्ड इस महत्वपूर्ण कालखंड में मिला है। 

बातचीत करके अच्छा लगा
मोदी ने कहा-आप सबसे बातचीत करके बहुत अच्छा लगा। आपसे आपके अनुभवों के बारे में भी जानने को मिला। कला, संस्कृति से लेकर वीरता, शिक्षा से लेकर innovation, समाज सेवा और खेल जैसे अनेक क्षेत्रों में आपकी असाधारण उपलब्धियों के लिये आपको अवार्ड मिले हैं।

अवार्ड से आपको बहुत बड़ी जिम्मेदार मिली है
इस अवार्ड के साथ आपको बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी मिली है। अब दोस्तों की, परिवार की, समाज की हर किसी की आपसे अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। इन अपेक्षाओं का आपको दबाव नहीं लेना है, इनसे प्रेरणा लेनी है। ये अवार्ड एक बहुत बड़ी स्पर्धा के बाद आपको मिले हैं, देश के हर कोने से बच्चे आगे आए हैं, उसमें से आपका नंबर लगा है। मतलब अवार्ड पाने वालों की संख्या भले ही कम है, लेकिन इस प्रकार से होनहार बालकों की संख्या हमारे देश में अपरम्पार है।

नेताजी से प्रेरणा
मोदी ने कहा-कल दिल्ली में इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस की डिजिटल प्रतिमा भी स्थापित की गई है। नेताजी से हमें सबसे बड़ी प्रेरणा मिलती है- कर्तव्य की, राष्ट्रप्रथम की। नेताजी से प्रेरणा लेकर आपको देश के लिए अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ना है।

गुरुगोविंद सिंह का जिक्र
मोदी ने कहा-हमारे भारत का एक और उदाहरण है- गुरु गोविन्द सिंह जी के बेटों का शौर्य और बलिदान! साहिबज़ादों ने जब असीम वीरता के साथ बलिदान दिया था तब उनकी उम्र बहुत कम थी। भारत की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और धर्म के लिए उनका बलिदान अतुलनीय है। पिछले साल दीवाली पर जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में गया था। वहां मेरी मुलाकात बलदेव सिंह और बसंत सिंह नाम के ऐसे वीरों से हुई जिन्होंने आज़ादी के बाद हुए युद्ध में बाल सैनिक की भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए उतनी कम उम्र में अपनी सेना की मदद की थी।

पूर्वजों के और त्याग का फल
हमारे पूर्वजों ने तप और त्याग किया उसके फल हम सभी को नसीब हुए हैं। आप एक ऐसे कालखंड में पहुंचे हैं, देश आज उस जगह पर पहुंचा है कि आप जो बोएंगे उसके फल आपको खाने को मिलेंगे, इतना जल्दी बदलाव होने वाला है। इसलिए आप देखते होंगे कि आज देश में जो नीतियां बन रही हैं, जो प्रयास हो रहे हैं उन सभी के केंद्र में हमारी युवा पीढ़ी है।

डिजिटल इंडिया
आज देश के सामने स्टार्टअप इंडिया जैसे मिशन हैं, स्टैंड अप इंडिया जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं, डिजिटल इंडिया का इतना बड़ा अभियान हमारे सामने है, मेक इन इंडिया को गति दी जा रही है, आत्मनिर्भर भारत का जनांदोलन देश ने शुरू किया है। हमारी आजादी के 75 साल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज हमारे सामने अपने अतीत पर गर्व करने का, उससे ऊर्जा लेने का समय है। ये समय वर्तमान के संकल्पों को पूरा करने का है, ये समय भविष्य के लिए नए सपने देखने का है, नए लक्ष्य निर्धारित करके उन पर बढ़ने का है।

वोकल फार लोकल
स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का बहुत बड़ा श्रेय भी मैं भारत के बच्चों को देता हूं। आप लोगों ने घर-घर में बाल सैनिक बनकर, अपने परिवार को स्वच्छता अभियान के लिए प्रेरित किया। जैसे आप स्वच्छता अभियान के लिए आगे आए, वैसे ही आप वोकल फॉर लोकल अभियान के लिए भी आगे आइए। आप घर में गितनी करें कि ऐसे कितने Products हैं, जो भारत में नहीं बने हैं, विदेशी हैं। इसके बाद घर के लोगों से आग्रह करें कि भविष्य में जब वैसा ही कोई Product खरीदा जाए तो वो भारत में बना हो।

वैक्सीनेशन प्रोग्राम
भारत के बच्चों ने अभी वैक्सीनेशन प्रोग्राम में भी अपनी आधुनिक और वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया है। 3 जनवरी के बाद से सिर्फ 20 दिनों में ही चार करोड़ से ज्यादा बच्चों ने कोरोना वैक्सीन लगवाई है।

नई शिक्षा नीति
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। इससे आपको पढ़ने में, सीखने में और आसानी होगी। आप अपनी पसंद के विषय पढ़ पाएं, इसके लिए भी शिक्षा नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में बेटियों को पहले इजाजत भी नहीं होती थी, बेटियाँ आज उनमें कमाल कर रही हैं। यही तो वो नया भारत है, जो नया करने से पीछे नहीं रहता, हिम्मत और हौसला आज भारत की पहचान है। आज हमें गर्व होता है कि दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियों के CEO युवा भारतीय हैं। आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि भारत के युवा स्टार्ट अप की दुनिया में अपना परचम फहरा रहे हैं। आज हमें गर्व होता है, जब हम देखते हैं कि भारत के युवा नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं,देश को आगे बढ़ा रहे हैं
 

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जानिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कारों के बारे में
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत में रहने वाले 5 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष तक (संबंधित वर्ष के 31 अगस्त को) के बच्चों को एक मान्यता के तौर पर दी जाती है जिन्होंने नवाचार, शैक्षिक उपलब्धि, खेल, कला एवं संस्कृति, समाज सेवा और बहादुरी जैसे 6 क्षेत्रों में असाधारण क्षमता और उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की हो। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक पदक, 1,00,000/- रुपये का नकद पुरस्कार और एक प्रमाण-पत्र दिया जाता है।

इस बार कोरोना के चलते परेड में शामिल नहीं होंगे
ये बाल पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं। प्रधानमंत्री हर साल इन पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत भी करते हैं। पीएमआरबीपी के विजेता हर साल गणतंत्र दिवस परेड में भी हिस्सा लेते हैं। हालांकि, देश में कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए इस वर्ष नई दिल्ली में पुरस्कार समारोह आयोजित करना संभव नहीं हो सका है।

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