
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने किसानों का जीवन बदलने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। 2007-14 के दौरान कृषि बजट 1.37 लाख करोड़ था। यह 2014-25 के लिए 5 गुना बढ़कर 7.27 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
किसानों को फसलों के नुकसान होने पर मदद के लिए सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) लेकर आई। यह किसान नामांकन के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना है। बीमा प्रीमियम के मामले में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी योजना है। इस योजना के तहत 4 करोड़ किसानों को फसल बीमा दिया जाता है।
कृषि से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की 48,352 परियोजनाओं के लिए 35,262 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 11,165 वेयरहाउस, 10,307 प्राथमिक प्रोसेसिंग यूनिट, 10,948 कस्टम हायरिंग सेंटर, 2,420 सार्टिंग और ग्रेडिंग इकाइयां, 1,486 कोल्ड स्टोर, 169 परख इकाइयां और लगभग 11,857 अन्य प्रकार की फसल कटाई के बाद की प्रबंधन परियोजनाएं और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियां शामिल हैं।
MSP में की गई ऐतिहासिक वृद्धि
नरेंद्र मोदी की सरकार ने फसलों पर मिलने वाली MSP में ऐतिहासिक वृद्धि की है। पहली बार सभी 22 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से न्यूनतम 50 प्रतिशत अधिक तय किया गया है। जमीन की सेहत की जानकारी देने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए। इससे किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की पोषक स्थिति की जानकारी मिलती है। 19 दिसंबर 2023 तक किसानों को 23.58 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जा चुके हैं।
310 लाख मीट्रिक टन हो गया यूरिया उत्पादन
पहले किसानों को यूरिया पाने के लिए काफी मशक्कत करनी होती थी। यूरिया की कालाबाजारी तक होती थी। पिछले 10 साल में यूरिया उत्पादन जो बढ़कर 310 लाख मीट्रिक टन हो गया है। 2014 में यह 225 लाख मीट्रिक टन था। 2014-15 से दिसंबर 2023 के दौरान कृषि यंत्रीकरण के लिए 6405.55 करोड़ रुपए आवंटित की गई है।
किसानों को दिए गए 2.80 लाख करोड़ रुपए
पीएम-किसान सम्मान योजना के तहत हर साल सीमांत और छोटे किसानों सहित 11.8 करोड़ किसानों को उनके बैंक अकाउंट में सहायता के पैसे दिए जाते हैं। इस योजना के तहत किसानों को अब तक 2.80 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिल चुकी है। किसानों को सस्ती कीमत पर खाद उपलब्ध कराने के लिए 10 साल में 11 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं।
पिछले 10 वर्षों में किसानों को धान और गेहूं की फसल के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के रूप में लगभग 18 लाख करोड़ रुपए मिले हैं। यह 2014 से पहले के 10 वर्षों की तुलना में 2.5 गुना अधिक है। 2022-23 में 1.2 करोड़ से अधिक किसानों को धान खरीद का लाभ हुआ है। 1.7 लाख करोड़ रुपए का एमएसपी सीधे उनके बैंक अकाउंट में डाला गया। 19 जून 2023 तक गेहूं की खरीद पिछले साल की कुल खरीद 74 लाख मीट्रिक टन से अधिक होकर 262 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची।
चार लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कृषि निर्यात
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 38 लाख किसानों को लाभ हुआ है। इससे 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। ई-नाम प्लेटफॉर्म से जुड़े बाजारों की संख्या 2016 में 250 से बढ़कर 2023 में 1,389 हो गई है। इससे 209 कृषि और बागवानी वस्तुओं के ऑनलाइन व्यापार की सुविधा मिली है। इस प्लेटफॉर्म पर 1.8 करोड़ से अधिक किसानों और 2.5 लाख व्यापारियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। सरकार ने पहली बार देश में कृषि निर्यात नीति बनाई है। इससे कृषि निर्यात 4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
मत्स्यपालन क्षेत्र में 38 हजार करोड़ रुपए से अधिक की योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। पिछले दस वर्षों में मछली उत्पादन 95 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 175 लाख मीट्रिक टन हो गया है। मत्स्यपालन क्षेत्र में निर्यात दोगुना से भी ज्यादा यानी 30 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर 64 हजार करोड़ रुपए हो गया है।
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