
केंद्रीय मंत्री ने शनिवार को प्रधानमंत्री की तरफ से भेजी गई चादर को अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोईनउद्दीन की दरगाह में पेश किया। उन्होंने सज्जादानशीनों के साथ मिलकर सूफ़ी संत की दरगाह पर चादर चढ़ाई और दुआ मांगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा- “मैं ख्वजा मोईनउद्दीन चिश्ती को नमन करता हूं, उनसे देशवासियों की प्रसन्नता और समृद्धि की कामना करता हूं।”
भारतीय प्रधानमंत्री अजमेर में सूफी संत के उर्स के दौरान पारंपरिक रूप से चादर भेजते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो जनवरी को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को अजमेर में पेश करने के लिए चादर सौंपी थी। भारतीय प्रधानमंत्री पारंपरिक रूप से अजमेर की दरगाह जाते रहे हैं। इंदिरा गांधी से लेकर मनमोहन सिंह तक अधिकतर प्रधानमंत्री अजमेर दरगाह पहुंचे हैं और वहां माथा टेका है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से स्वंय कभी अजमेर की दरगाह नहीं गए हैं लेकिन वो अपने मंत्री के माध्यम से अजमेर दरगाह पर चादर भेजते हैं।
इस साल हिंदूवादी संगठनों ने प्रधानमंत्री की तरफ से अजमेर चादर भेजे जाने का विरोध किया है। अजमेर दरगाह के महादेव मंदिर होने का दावा पेश करने वाले कार्यकर्ता विष्णु गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस साल अजमेर चादर ना भेजने की अपील की थी। विष्णु गुप्ता ने तर्क दिया था कि प्रधानमंत्री की तरफ से चादर जाने से उनका कैस प्रभावित हो सकता है। विष्णु गुप्ता ने अजमेर की स्थानीय अदालत में याचिका दायर कर अजमेर दरगाह के हिंदू मंदिर होने का दावा किया है और इसके सर्वे की मांग की है।
इस साल अजमेर में ख्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती का 813 उर्स है। इस धार्मिक आयोजन के लिए देश विदेश से श्रद्धालु अजमेर पहुंचते हैं। ख्वाजा मोईनउद्दीन चिश्ती की दरगाह दक्षिण एशिया के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां सभी धर्मों के लोग पहुंचते हैं और अपनी बेहतरी के लिए दुआ मांगते हैं।
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