
नई दिल्ली. कृषि कानूनों को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। इसी बीच मुद्दे को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी से भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मान ने अपना नाम वापस ले लिया है। भूपेंद्र सिंह मान ने कहा कि वे किसानों के साथ हैं।
'कमेटी से क्यों अलग हुए मान'
मान ने बयान जारी कर कहा, मुझे चार लोगों की कमेटी में शामिल किया गया, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं। मैं एक किसान और यूनियन लीडर हूं, इस नाते लोगों और किसानों की आशंकाओं को देखते हुए, मैं इस कमेटी से अलग हो रहा हूं। मैं पंजाब के हितों से समझौता नहीं कर सकता हूं। इसके लिए मैं किसी भी पद को कुर्बान कर सकता हूं और हमेशा पंजाब के किसानों के साथ खड़ा रहूंगा।
कौन हैं भूपेंद्र सिंह मान ?
15 सितंबर 1939 को गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में पैदा हुए सरदार भूपिंदर सिंह मान को किसानों के संघर्ष में योगदान के लिए भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा 1990 में राज्यसभा में नामांकित किया गया था। उन्होंने 1990-1996 तक सेवा की। उनके पिता एस अनूप सिंह इलाके के एक प्रमुख जमींदार थे।
भूपेंद्र सिंह मान ने 2019 में खुलकर किया था कांग्रेस का समर्थन
किसान संगठन और कांग्रेस जिस कमेटी को प्रो प्रो-गवर्नमेंट बता रहे हैं, उसमें भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मान का नाम भी शामिल है। खास बात ये है कि भूपेंद्र सिंह मान खुले तौर पर कांग्रेस के समर्थक माने जाते हैं। यहां तक की 2019 लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के समर्थन में तमाम रैलियां और कार्यक्रम भी कराए थे। यहां तक की उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के घोषणापत्र की तुलना कर कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही थी।
कमेटी पर उठ रहे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाते हुए चार सदस्यों की कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में भूपेंद्र सिंह मान (प्रेसिडेंट, भारतीय किसान यूनियन), डॉ. प्रमोद कुमार जोशी (इंटरनेशनल पॉलिसी हेड) , अशोक गुलाटी (एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट) और अनिल धनवत (शेतकरी संगठन, महाराष्ट्र) लोग शामिल हैं। इस कमेटी पर किसान संगठन और विपक्ष ने सवाल उठाए थे। कांग्रेस का कहना है कि कमेटी में शामिल 4 लोगों ने सार्वजनिक तौर पर पहले से ही निर्णय कर रखा है कि ये काले कानून सही हैं और कह दिया है कि किसान भटके हुए हैं। ऐसी कमेटी किसानों के साथ न्याय कैसे करेगी?
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